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  • 2026-08-01

CWG 2026: जैस्मीन लंबोरिया ने ग्लास्गो में रचा इतिहास, डिफेंडिंग चैंपियन को 5-0 से हराकर 57kg वर्ग में जीता गोल्ड

Indian Boxer Jaismine: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की मुक्केबाज जैस्मीन लंबोरिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया. फाइनल मुकाबले में उन्होंने नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकेला वॉल्श को 5-0 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया. मिकेला वॉल्श पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता थीं, लेकिन इस बार जैस्मीन ने उन्हें एकतरफा मुकाबले में मात दी.

बॉक्सिंग में भारत को मिला दूसरा गोल्ड
जैस्मीन लंबोरिया कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग में गोल्ड जीतने वाली भारत की दूसरी महिला मुक्केबाज बन गई हैं. इससे पहले प्रीति पवार ने 54 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पहला गोल्ड दिलाया था.

चार साल में कांस्य से गोल्ड तक का सफर
24 वर्षीय जैस्मीन ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य पदक जीता था. इस बार उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए सीधे स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. अब वह विश्व चैंपियन होने के साथ-साथ कॉमनवेल्थ चैंपियन भी बन गई हैं.

ब्रिटेन की धरती पर लगातार शानदार प्रदर्शन
जैस्मीन लंबोरिया का यूनाइटेड किंगडम में प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है. उन्होंने बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता. इसके बाद लिवरपूल में 2025 विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड अपने नाम किया. अब ग्लास्गो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया. लगातार तीन बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि है.

परिवार से मिली बॉक्सिंग की प्रेरणा
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली जैस्मीन लंबोरिया का परिवार लंबे समय से बॉक्सिंग से जुड़ा रहा है. उनके परदादा हवा सिंह भारतीय मुक्केबाजी के दिग्गज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता रहे थे. जैस्मीन को शुरुआती ट्रेनिंग उनके चाचा संदीप सिंह और परविंदर सिंह ने दी.



भारतीय सेना में भी निभा रही हैं जिम्मेदारी
लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद साल 2022 में जैस्मीन लंबोरिया भारतीय सेना की मिलिट्री पुलिस कोर में शामिल हुईं. वह नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं और भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला मुक्केबाज मानी जाती हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह गोल्ड उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है.
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