CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की स्टार मुक्केबाज प्रीति पवार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया. फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर गोल्ड अपने नाम किया. यह कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रीति का पहला स्वर्ण पदक है. उनकी जीत के साथ भारत के खाते में ग्लास्गो खेलों का छठा गोल्ड मेडल भी जुड़ गया. फाइनल में प्रीति ने शुरुआत से आखिर तक मुकाबले पर अपना दबदबा बनाए रखा और तीनों राउंड में शानदार खेल दिखाया.
प्रीति पवार ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया. राउंड ऑफ-16 में उन्होंने डेबोरा मटेंजे को हराया. इसके बाद क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ आयरलैंड की निकोल क्लाइड को मात दी. सेमीफाइनल में जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को हराकर फाइनल में जगह बनाई. फाइनल में उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया.
शुरुआत में बॉक्सिंग से लगता था डर
आज दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली प्रीति पवार कभी बॉक्सिंग नहीं करना चाहती थीं. उन्हें लगता था कि इस खेल में चेहरे पर चोट लग सकती है. लेकिन उनके चाचा और पूर्व बॉक्सर विनोद पवार ने उन्हें समझाया और बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू कराई. हरियाणा के भिवानी में उन्होंने अभ्यास किया और धीरे-धीरे इसी खेल में अपनी पहचान बना ली.
परिवार से मिला खेल का माहौल
प्रीति के पिता सोमवीर पवार हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं और पहले कबड्डी खिलाड़ी भी रह चुके हैं. उनकी मां शामिनी देवी भी पूर्व एथलीट हैं. घर में खेल का माहौल पहले से था, लेकिन फिल्म “दंगल” देखने के बाद उनके पिता ने बेटी को खेलों में आगे बढ़ाने का फैसला किया. ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक की सफलता ने भी उन्हें प्रेरित किया.
भारतीय सेना में भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत प्रीति पवार भारतीय सेना में जूनियर अधिकारी बनीं. उन्हें भारतीय सेना में सीधे जूनियर अधिकारी के रूप में कमीशन पाने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर माना जाता है.
प्रीति पवार की बड़ी उपलब्धियां
प्रीति ने 14 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की. इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2021, एशियन अंडर-22 चैंपियनशिप 2024, वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स 2025, एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 और अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया.