सरकार को भेजा पत्र, ऑटोमेटेड सिस्टम की चूक स्वीकार
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, मेटा ने केंद्र सरकार को एक पत्र भेजकर इस पूरी घटना पर खेद जताया है. कंपनी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के वीडियो को हटाना किसी सोची-समझी कार्रवाई का हिस्सा नहीं था, बल्कि एआई और ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में आए एक तकनीकी ग्लिच का नतीजा था. मेटा ने पुष्टि की है कि वीडियो को तुरंत प्लेटफॉर्म पर दोबारा बहाल कर दिया गया है.
महज माफी से संतुष्ट नहीं सरकार, होगी उच्चस्तरीय बैठक
केंद्र सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि केवल औपचारिक खेद जता देना ही काफी नहीं है. सरकार यह जानना चाहती है कि इतना गंभीर सुरक्षा और एल्गोरिदम फेलियर आखिर कैसे हुआ. सूत्रों के मुताबिक, आगामी 7 से 10 दिनों में भारत सरकार और मेटा के वैश्विक अधिकारियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है. इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, ऑटोमेटेड सिस्टम के काम करने के तरीके और वीआईपी खातों के सुरक्षा तंत्र पर आमने-सामने विस्तृत चर्चा की जाएगी.
Meta इंडिया प्रमुख अरुण श्रीनिवास पर हैदराबाद में FIR दर्ज
विवाद की आंच अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गई है. हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री से जुड़े कथित मॉर्फ्ड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा परिवर्तित) वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार के सिलसिले में मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं देश प्रमुख अरुण श्रीनिवास के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है. इसके साथ ही पुलिस ने मामले में कुछ अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स को भी नामजद किया है और जांच शुरू कर दी है.
सोशल मीडिया नियमों को और सख्त करने की तैयारी
इस पूरे विवाद के बाद केंद्र सरकार सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने वाले नियमों में कड़े संशोधन करने पर विचार कर रही है. नए नियामकीय प्रावधानों में यूजर वेरिफिकेशन को अनिवार्य बनाने और फर्जी व फर्जीवाड़े वाले खातों पर नकेल कसने जैसे सख्त कदम शामिल हो सकते हैं. सरकार का स्पष्ट मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने मॉडरेशन सिस्टम को इतना मजबूत और पारदर्शी बनाना होगा कि इस तरह की प्रशासनिक व तकनीकी चूक दोबारा न दोहराई जा सके.