Jharkhand News : झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के दो अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस ले ली है। विभाग ने इस संबंध में अलग-अलग संकल्प और अधिसूचना जारी की है। दोनों मामलों में अदालत से राहत मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है।
संजीव कुमार लाल का निलंबन समाप्त, सेवा में वापसी
पहला मामला झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव कुमार लाल का है, जो पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव रह चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें पीएमएलए (PMLA) से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
मई 2026 में अदालत से जमानत मिलने के बाद संजीव कुमार लाल ने कार्मिक विभाग में योगदान दिया। विभाग ने उनका योगदान 15 मई 2026 से प्रभावी मानते हुए स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उनका निलंबन भी समाप्त कर दिया गया है।
हाईकोर्ट से राहत मिलने पर जितेंद्र कुमार मुंडा के खिलाफ कार्रवाई भी खत्म
दूसरा मामला झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जितेंद्र कुमार मुंडा का है, जो चान्हो के तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) रह चुके हैं। उनके खिलाफ एसएआर (SAR) से जुड़े मामले में विभागीय कार्रवाई की गई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने नियमों का पालन किए बिना जमीन संबंधी मामले में अनुचित सहायता की थी।
विभाग ने पहले उनकी अपील खारिज करते हुए वेतन वृद्धि की दो किस्तें रोकने का दंड दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अदालत से राहत मिलने के बाद कार्मिक विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा की और पूर्व में जारी दंडादेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उनके खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई भी समाप्त कर दी गई।