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  • 2026-07-24

BREAKING: पेपर लीक संशोधन बिल को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, 27 जुलाई को संसद में किया जा सकता है पेश

BREAKING: देशभर में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में पेपर लीक से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई. सरकार इसे 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है. माना जा रहा है कि नए प्रावधानों के जरिए परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सजा और कानूनी कार्रवाई को और कड़ा बनाया जाएगा.

आधी रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी कर चुके थे प्रधानमंत्री
कैबिनेट के फैसले से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई की देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी किया था. उन्होंने कहा था कि पेपर लीक कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है. प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ और सख्त कानूनी प्रावधान लाने जा रही है.

उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है. दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो, इसके लिए रिकॉर्ड समय में करीब 22 लाख अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराई गई. उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा का परिणाम 19 जुलाई को घोषित कर दिया गया.

राहुल गांधी और CJP ने उठाए सवाल
प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और केवल वीडियो संदेश से उनकी नाराजगी दूर नहीं होगी. उन्होंने सरकार से शिक्षा मंत्री को हटाने, छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की.

वहीं, नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन चला रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में सख्त कार्रवाई करना चाहती है तो सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही सबसे बड़ा संदेश होगा.

लगातार दूसरे बयान में भी पीएम ने दोहराया सख्त कार्रवाई का भरोसा
इससे पहले 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक में भी प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक को "घोर पाप" बताया था. उन्होंने कहा था कि सरकार को जैसे ही जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई की गई और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. उन्होंने राज्यों से भी अपील की थी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाया जाए.

23 जुलाई को जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और छात्रों को वर्षों तक न्याय का इंतजार न करना पड़े.

शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में भी अहम बदलाव किए हैं. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है. वे विनीत जोशी की जगह लेंगे, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है. वहीं टी.के. अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव बनाया गया है. इन नियुक्तियों को भी सरकार के शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने बनाया विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट
पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किया है. अदालत ने इस श्रेणी के सभी मामलों को इसी विशेष अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है. विशेष न्यायाधीश के रूप में अनु ग्रोवर बालीगा की नियुक्ति की गई है, जो इन मामलों की सुनवाई करेंगी.

क्या है "पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024"
देश में पहली बार परीक्षा में धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार ने "पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024" लागू किया था. इस कानून को 12 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू किया गया.

इस कानून के तहत पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान है. व्यक्तिगत स्तर पर दोषी पाए जाने पर तीन से पांच वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. यदि किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने आती है तो पांच से दस वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

अगर परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध पाई जाती है तो उस पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही परीक्षा आयोजन की पूरी लागत की वसूली और चार वर्ष तक परीक्षा कराने पर रोक लगाने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं. इस कानून के तहत दर्ज अपराध गैर-जमानती हैं और इनकी जांच डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारी ही कर सकते हैं.



CBI जांच और आंदोलन जारी
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है. जांच एजेंसी महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली समेत कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ कर चुकी है. अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है.

उधर, जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन अभी भी जारी है. संगठन लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहा है. सरकार की ओर से विधायी और प्रशासनिक कदम उठाए जाने के बावजूद आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना यह विवाद समाप्त नहीं होगा.
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