Ayodhya News: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में मंदिर प्रशासन, प्रबंधन और भविष्य की व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मणिरामदास जी की छावनी में हुई न्यासी मंडल की बैठक में नए सचिव और आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति का फैसला किया गया। ट्रस्ट ने बताया कि नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन में अभी करीब एक माह का समय लगेगा, इसलिए प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए अस्थायी सचिव नियुक्त किया जाएगा।
श्रावण में बढ़ेगी भीड़, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था होगी मजबूत
बैठक में श्रावण मास के दौरान रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और दर्शन व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर चर्चा हुई। ट्रस्ट ने कहा कि सचिव की नियुक्ति से व्यवस्थाओं का बेहतर समन्वय होगा। साथ ही एक आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने का भी निर्णय लिया गया, ताकि ट्रस्ट की प्रमाणिक जानकारी समय पर मीडिया और श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जा सके।
रिक्त पदों पर नियुक्ति और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
चंपत राय, अनिल मिश्र के त्यागपत्र और बिमलेंद्र मोहन मिश्र के निधन के बाद रिक्त हुए तीन ट्रस्टी पदों को भरने पर भी विचार हुआ। हालांकि अंतिम फैसला अगली बैठक में लिया जाएगा। इसके अलावा मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली और तकनीकी कमियों की समीक्षा करते हुए सुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
चढ़ावा प्रबंधन पर चर्चा, एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार
बैठक में चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी रिपोर्ट पर चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण फैसला टाल दिया गया। ट्रस्ट ने रामलला को प्राप्त स्वर्ण और रजत चढ़ावे की जांच भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक संस्था टकसाल (मिंट) के माध्यम से जारी रखने का निर्णय लिया, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। वहीं चढ़ावा प्रबंधन में स्टेट बैंक की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए वित्त समिति को इसकी समीक्षा के निर्देश दिए गए।
जल्द होगी अगली बैठक, लंबित फैसलों पर लगेगी मुहर
ट्रस्ट ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ सप्ताह में न्यासी मंडल की एक और बैठक बुलाई जाएगी। इसमें रिक्त पदों पर नियुक्ति, नए सीईओ के चयन, चढ़ावा प्रबंधन और अन्य लंबित प्रशासनिक विषयों पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। ट्रस्ट ने कहा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सुचारु बनाया जाएगा।