Jamshedpur: भाई के बलिदान के बाद भी हौसला न खोने वाली लक्ष्मी कुमारी आज देश के वीर जवानों के प्रति अपने समर्पण को लेकर मिसाल बन चुकी हैं। वर्ष 2015 में अपने भाई शहीद किसान दुबे को खोने के बाद उन्होंने सरहद पर तैनात जवानों को अपना भाई मान लिया और हर साल रक्षाबंधन के मौके पर उनके लिए राखियां भेजने की परंपरा शुरू की।
बिष्टुपुर पोस्ट ऑफिस पहुंचकर भेजीं जवानों के लिए राखियां
लक्ष्मी कुमारी बुधवार को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंचीं, जहां से उन्होंने देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए राखियां भेजीं। उनका कहना है कि देश की रक्षा में जुटे हर जवान के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता है और वह इस परंपरा को आगे भी जारी रखेंगी। लक्ष्मी कुमारी हर वर्ष पूरे सम्मान और नियमों के साथ 101 राखियां जवानों के लिए भेजती हैं। इस बार उन्होंने पहले चरण में 60 राखियां पोस्ट के माध्यम से रवाना की हैं, जो जल्द ही देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सैनिकों तक पहुंचेंगी।
भाई के बलिदान को बनाया देश सेवा का संकल्प
लक्ष्मी कुमारी के लिए यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने शहीद भाई की स्मृति को जीवित रखने का माध्यम है। उनका मानना है कि एक भाई ने देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया, तो अब देश की रक्षा करने वाले हर जवान में उन्हें अपने भाई की झलक दिखाई देती है। उनका यह भाव और समर्पण आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।