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  • 2026-07-21

Punjab Farmers Protest : India-US FTA के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच, शंभू बॉर्डर सील, सरकार ने दो मांगों पर दी सहमति

Punjab Farmers Protest: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में पंजाब के किसानों ने दिल्ली की ओर मार्च शुरू कर दिया. किसान संगठनों का कहना है कि इस समझौते से देश के किसानों की आमदनी और फसलों के दाम पर असर पड़ सकता है. इस बीच हरियाणा सरकार के साथ हुई बैठक में किसानों की दो अहम मांगों पर सहमति बनने से बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद भी बढ़ी है.
FTA के विरोध में दिल्ली की ओर बढ़े किसान
देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले किसान नेता सरवन सिंह पंधेर की अगुवाई में बड़ी संख्या में किसान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर जुटे. दिल्ली रवाना होने से पहले किसानों ने किसान घाट पर करीब चार घंटे तक सभा की और केंद्र सरकार से प्रस्तावित भारत-अमेरिका FTA पर दोबारा विचार करने की मांग उठाई.

किसान संगठनों का दावा है कि अगर यह समझौता लागू हुआ तो विदेश से सस्ते कृषि उत्पाद भारत आ सकते हैं. उनका कहना है कि इससे घरेलू किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने में मुश्किल होगी. किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर उनसे कोई राय नहीं ली गई और सरकार को पहले उनसे बातचीत करनी चाहिए.

सीमा पर कड़ी सुरक्षा, कई रास्तों पर असर
किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए प्रशासन ने शंभू बॉर्डर को पूरी तरह बंद कर दिया. इलाके में धारा-163 लागू की गई और बड़ी संख्या में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई.

सीमा पर कंक्रीट बैरिकेड, सीमेंट स्लैब और अन्य अवरोधक लगाए गए हैं. दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर बड़े ट्रक और ट्राले खड़े कर रास्ता रोका गया, जिससे कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा. फिलहाल पंजाब की ओर से हरियाणा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है.

सरकार ने दिए दो अहम आश्वासन
दिल्ली कूच के दौरान किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा. बैठक में अंबाला के उपायुक्त भी मौजूद रहे, जहां किसानों की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई.

बैठक के बाद सरकार ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की जल्द रिहाई का भरोसा दिया. साथ ही एक सप्ताह के भीतर किसानों की केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक कराने का आश्वासन भी दिया गया. अब किसान संगठनों की नजर इन दोनों आश्वासनों के अमल पर टिकी है. यदि तय समय पर कार्रवाई होती है तो आगे की बातचीत का रास्ता और मजबूत हो सकता है.
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