Ranchi News : रिम्स में CID की छापेमारी के 27 दिन बाद भी अब तक किसी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों और सबूतों की जांच में जुटी है। इस दौरान फर्जी नामांकन, दवा खरीद और करोड़ों रुपये के टेंडर से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले सत्र में हुए MBBS और BDS के 20 से अधिक नामांकन जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि कुछ छात्रों ने फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश लिया। CID ने चार छात्रों से संबंधित जानकारी रिम्स से मांगी है और उनके प्रमाण पत्र संबंधित जिलों में सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले दो छात्रों का नामांकन रद्द किया जा चुका है।
दवा खरीद और करोड़ों के टेंडर की भी हो रही जांच
जांच के दौरान रिम्स के स्टॉक में खराब और सड़ी हुई दवाएं मिलने की जानकारी भी सामने आई है। CID ने दवा और उपकरण खरीद से जुड़े दस्तावेजों के साथ कई टेंडरों के रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए हैं।
सैनिटेशन, हाउसकीपिंग और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडर भी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि तकनीकी और वित्तीय मानकों पर अयोग्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की तीन कंपनियों को पात्र घोषित किया गया था। यह टेंडर तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार के कार्यकाल में हुआ था और CID उनसे भी पूछताछ करेगी।
फिलहाल जांच जारी है। दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज करने और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।