Crude Oil Prices: पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड ने भी 85 डॉलर का स्तर पार कर लिया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है.
ब्रेंट और WTI दोनों में मजबूत तेजी
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन ब्रेंट क्रूड में जोरदार बढ़त देखने को मिली. कारोबार के दौरान इसकी कीमत 90.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, जो करीब डेढ़ महीने का उच्चतम स्तर है. हालांकि बीच में मामूली गिरावट आई, लेकिन बाद में फिर तेजी लौट आई. भारतीय समयानुसार सुबह करीब 11:15 बजे ब्रेंट क्रूड 90.58 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 2.81 प्रतिशत अधिक था. वहीं WTI क्रूड भी शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है. दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है. यदि यहां लंबे समय तक किसी तरह की बाधा बनी रहती है तो वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है और कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेजी जारी रह सकती है.
भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. ईंधन महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव बनने की आशंका है. इसके साथ ही चालू खाता घाटा बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और विदेशी निवेश के प्रवाह पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति से जुड़े अगले घटनाक्रम पर बनी हुई है.