Jharkhand Weather Update: झारखंड में शनिवार (18 जुलाई) को मौसम का मिजाज बिगड़ने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई जिलों में गर्जन, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी जारी की है। रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और खूंटी में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुककर तेज बारिश होने की संभावना है। प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे नहीं रुकने की अपील की गई है।
19 से 21 जुलाई तक भी बरसेगा मानसून, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग के अनुसार 19 जुलाई को भी पूरे राज्य में मौसम का यही मिजाज बना रहेगा। वहीं 20 और 21 जुलाई को दक्षिण-पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी और मध्य झारखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। इन दिनों भी तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। विभाग ने किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है। हालांकि 22 और 23 जुलाई से मौसम में कुछ सुधार होने की उम्मीद जताई गई है।
कमजोर पड़ा लो-प्रेशर, फिर भी सक्रिय है मानसून ट्रफ
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि उत्तर ओडिशा के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ चुका है और फिलहाल गंगीय पश्चिम बंगाल व झारखंड के हिस्सों में स्थित है। इसके बावजूद मानसून ट्रफ सक्रिय रहने से बारिश की स्थिति बनी हुई है। पिछले 24 घंटे में राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि लातेहार के बालूमाथ में सबसे अधिक 100 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बोकारो थर्मल का अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस और लातेहार का न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मानसून अब भी कमजोर, 22 जिलों में सामान्य से 40% तक कम बारिश
इस वर्ष झारखंड में मानसून की रफ्तार अब भी कमजोर बनी हुई है। 1 जून से 17 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 24 में से 22 जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से नीचे है, जिससे खेतों में दरारें पड़ने और सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। गढ़वा में 72 प्रतिशत, चतरा में 70 प्रतिशत और कोडरमा में 63 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने के कारण ये जिले “स्कैंटी” श्रेणी में पहुंच गए हैं। देवघर, पाकुड़, हजारीबाग और साहिबगंज में भी 50 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी रही, जबकि सिमडेगा में केवल 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो सामान्य के सबसे करीब है।