Ranchi News : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर खनन क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद राज्य अपनी क्षमता के अनुरूप विकास नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के करीब 40 प्रतिशत खनिज संसाधन झारखंड में हैं, लेकिन खनन, राजस्व और रोजगार के मामले में राज्य लगातार पीछे है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 से अब तक देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, जिनमें ओडिशा में 45, छत्तीसगढ़ में 41 और झारखंड में केवल 3 ब्लॉकों की नीलामी हुई। उन्होंने कहा कि चाईबासा के सारंडा क्षेत्र के दौरे में कई खदानें वर्षों से बंद मिलीं, जिनकी लीज समाप्त होने के बाद न तो नवीनीकरण हुआ और न ही दोबारा नीलामी की गई।
बंद खदानों से रोजगार पर असर, ओडिशा मॉडल का दिया उदाहरण
मरांडी ने कहा कि बंद खदानों के कारण हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है। युवाओं का पलायन बढ़ा है और स्थानीय बाजारों की आर्थिक गतिविधियां भी कमजोर हुई हैं। उन्होंने कहा कि कभी आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा जामदा बाजार आज मंदी की मार झेल रहा है, जिससे छोटे व्यापारी, होटल व्यवसायी, परिवहन क्षेत्र और मजदूर सभी प्रभावित हैं।
उन्होंने ओडिशा के बड़बिल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां समय पर खदानों की नीलामी और उत्पादन शुरू होने से रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच ओडिशा का लौह अयस्क उत्पादन 120 मिलियन टन से बढ़कर 180 मिलियन टन हो गया, जबकि झारखंड का उत्पादन लगभग 23 मिलियन टन पर ही स्थिर है।
DMFT फंड के उपयोग पर भी उठाए सवाल, पारदर्शिता की मांग
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनन से लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि ओडिशा ने 46 हजार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। उन्होंने कहा कि नोआमुंडी क्षेत्र में 9 में से 7 पत्थर खदानें बंद हैं और झींकपनी स्थित ACC प्लांट 16 अगस्त से बंद होने जा रहा है, जिससे करीब 1600 परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
उन्होंने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में वर्ष 2016 से 2026 तक करीब 3700 करोड़ रुपये जमा हुए, लेकिन खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका आरोप था कि DMFT की वेबसाइट पर अंतिम अपडेट वर्ष 2018 का है, जिससे खनन प्रभावित गांवों के लोगों को योजनाओं की जानकारी नहीं मिल रही।
मरांडी ने कहा कि सारंडा और पश्चिमी सिंहभूम जैसे खनिज संपन्न क्षेत्रों के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से बंद खदानों की जल्द नीलामी, खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और DMFT फंड के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। इस दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा, शोभा यादव और मृत्युंजय शर्मा भी मौजूद रहे।