Current News : सुप्रीम कोर्ट ने कृषि भूमि से जुड़े उत्तराधिकार मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) की धारा 22 कृषि भूमि पर भी लागू होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को विरासत में मिली कृषि भूमि में उसका हिस्सा है और वह उसे किसी बाहरी व्यक्ति को बेचना चाहता है, तो सबसे पहले उसी संपत्ति के अन्य क्लास-I उत्तराधिकारियों (Class-I Heirs) को उसे खरीदने का अवसर देना होगा।
यह अधिकार केवल विरासत में मिली संपत्ति पर लागू होगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 22 के तहत दिया गया यह अधिकार कोई सामान्य "प्री-एम्प्शन" (पहले खरीदने का अधिकार) नहीं, बल्कि उत्तराधिकार प्रक्रिया का हिस्सा है। यह केवल उन मामलों में लागू होगा, जहां संपत्ति बिना वसीयत (Intestate Succession) के क्लास-I उत्तराधिकारियों को विरासत में मिली हो। यह प्रावधान सामान्य खरीदारों या संयुक्त रूप से खरीदी गई संपत्ति पर लागू नहीं होगा।
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा
यह मामला महिंदर बनाम पुरन सिंह से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि संसद को कृषि भूमि से जुड़े उत्तराधिकार मामलों में कानून बनाने का पूरा अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 22 का उद्देश्य विरासत में मिली पारिवारिक संपत्ति को यथासंभव परिवार के भीतर बनाए रखना है। इस फैसले के बाद विरासत में मिली कृषि भूमि की बिक्री से जुड़े मामलों में क्लास-I उत्तराधिकारियों के अधिकार और अधिक स्पष्ट हो गए हैं।