Jamshedpur: बारिश के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को पर्याप्त बेड और स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। कई मरीजों का इलाज मजबूरी में फर्श और स्टील की कुर्सियों पर किया जा रहा है। कांड्रा निवासी राहुल को सोमवार रात अचानक उल्टी और तबीयत बिगड़ने के बाद एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें बेड तो दूर, स्ट्रेचर तक नहीं मिल सका। इसके बाद उन्हें लंबी स्टील की कुर्सी पर लिटाकर इलाज शुरू किया गया। परिजनों के अनुसार, सलाइन चढ़ाने के लिए स्टैंड भी उपलब्ध नहीं था। मजबूरी में फायर एक्सटिंग्विशर के सहारे सलाइन की बोतल टांगकर उपचार किया गया।
कई मरीजों को झेलनी पड़ी परेशानी
कदमा निवासी असगर अंसारी को मंगलवार सुबह करीब 9 बजे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उन्हें भी बेड और स्ट्रेचर नहीं मिल पाया। शुरुआत में कुर्सी पर लिटाकर इलाज किया गया, लेकिन बाद में जगह की कमी के कारण उन्हें फर्श पर लिटाकर उपचार जारी रखना पड़ा। वहीं, साकची निवासी चांदनी देवी को बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया। बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका इलाज भी कुर्सी पर ही शुरू किया गया। एमजीएम अस्पताल में लंबे समय से बेड क्षमता बढ़ाने और संसाधन विस्तार की मांग उठती रही है। हालांकि, मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुसार सुविधाओं में पर्याप्त विस्तार नहीं हो सका है। इसका सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी सेवा पर दिखाई दे रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
बरसात के मौसम में वायरल बीमारी, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। मरीजों और परिजनों को इलाज के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लगातार सामने आ रही ऐसी तस्वीरों ने एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था और स्वास्थ्य संसाधनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।