Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के मेडिकल अधिकारी डॉ. बिनोद कुमार सिंह को बड़ी राहत दी है. अदालत ने वर्ष 2005 की प्रतिकूल एपीएआर (APAR) के आधार पर पारित आईटीबीपी के आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही महानिदेशक, आईटीबीपी को पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा कर 16 सप्ताह के भीतर कारणयुक्त आदेश जारी करने का निर्देश दिया है.
2017 का आदेश किया निरस्त
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 7 नवंबर 2017 को आईटीबीपी द्वारा जारी आदेश को रद्द करते हुए याचिका स्वीकार कर ली. कोर्ट ने कहा कि मामले की निष्पक्ष तरीके से दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए.
बिलों पर हस्ताक्षर से इनकार के बाद बढ़ा विवाद
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2005 में जालंधर में तैनाती के दौरान तत्कालीन कमांडेंट ईश्वर सिंह दुहान ने कुछ बिलों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया था. उन्होंने इसका विरोध किया और शिकायत भी दर्ज कराई. इसके बाद उनके खिलाफ प्रतिकूल एपीएआर दर्ज कर दी गई, जिसका असर उनकी पदोन्नति पर पड़ा और उनके जूनियर अधिकारी उनसे पहले प्रमोट हो गए.
हाईकोर्ट ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद आईटीबीपी ने मामले की निष्पक्ष समीक्षा नहीं की. नए आदेश में भी याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विचार करने के बजाय केवल रिपोर्टिंग अधिकारी की टिप्पणियों को दोहरा दिया गया.
दोबारा होगी APAR की समीक्षा
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष होने चाहिए और पक्षपात की आशंका से भी बचना जरूरी है. अदालत ने निर्देश दिया कि दोबारा समीक्षा के दौरान संबंधित रिपोर्टिंग अधिकारी की टिप्पणियों को आधार न बनाया जाए. यदि उस समय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हों तो उनके रिकॉर्ड के आधार पर एपीएआर का नया मूल्यांकन किया जाए.