Entertainment News: दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को बिना किसी बड़े प्रचार के ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन सिर्फ 48 घंटे बाद ही भारत में इसे ब्लॉक कर दिया गया. फिल्म का पहले नाम पंजाब 95 था. सेंसर बोर्ड, सरकार और मेकर्स के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण यह फिल्म रिलीज से पहले ही सुर्खियों में थी.
जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है फिल्म, सच दिखाने का किया गया दावा
फिल्म की कहानी पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से जुड़ी है. 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने उन लोगों के मामलों की जांच की थी, जो अचानक लापता हो गए थे. जांच के दौरान उन्होंने कई ऐसे रिकॉर्ड जुटाने का दावा किया, जिनमें बड़ी संख्या में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार का जिक्र था. बाद में उन्होंने यह जानकारी सार्वजनिक की. कुछ समय बाद उनका अपहरण हो गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई. इस मामले में सीबीआई जांच के बाद कई पुलिस अधिकारियों को सजा भी मिली. फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया है.
127 कट लगाने की शर्त बनी सबसे बड़ा विवाद, फिर अचानक फिल्म क्यों हटाई गई
फिल्म को पहले सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था, लेकिन सेंसर बोर्ड ने 127 बदलाव करने को कहा. बोर्ड ने फिल्म का नाम बदलने, कई सीन हटाने और कुछ संवाद हटाने के निर्देश दिए. मेकर्स का कहना था कि इतने बदलाव के बाद फिल्म की असली कहानी ही बदल जाएगी. इसके बाद फिल्म को सीधे ZEE5 पर रिलीज किया गया.
रिलीज के दो दिन बाद केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत कार्रवाई करते हुए भारत में फिल्म की स्ट्रीमिंग बंद करने का आदेश दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार का कहना था कि फिल्म के कुछ हिस्सों से कानून व्यवस्था और सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है.
भारत में बैन, विदेशों में अब भी देखी जा रही फिल्म, कानूनी लड़ाई जारी
भारत में फिल्म पर रोक लगने के बाद भी कई दूसरे देशों में ZEE5 के जरिए इसकी स्ट्रीमिंग जारी रही. इस बीच फिल्म इंटरनेट पर भी लीक हो गई. सोशल मीडिया पर इसके वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. पंजाब के कुछ इलाकों में लोगों ने इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग भी की. अब मेकर्स फिल्म का नया संस्करण भारत में रिलीज करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं अदालत में भी इस मामले की सुनवाई को लेकर सभी की नजर बनी हुई है. सतलुज अब सिर्फ एक फिल्म नहीं रही. यह सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की आजादी और कानून व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दों पर छिड़ी बहस का हिस्सा बन चुकी है.