Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने अलकतरा (बिटुमेन) घोटाला मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन पूर्व इंजीनियरों को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है. न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वर्ष 2019 में सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत द्वारा प्रार्थी उपेंद्र कुमार सिंह (पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर), उमेश पासवान और राजबली राम को सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त कर दिया.
2009 में दर्ज हुआ था सीबीआई केस
यह पूरा मामला वर्ष 2009 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किए गए एक मुकदमे से जुड़ा हुआ है. तीनों अभियंतों पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी सड़कों के निर्माण के लिए बिटुमेन (अलकतरा) की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़ा किया था, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा और सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ.
हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था, जिसके आधार पर विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था. हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपियों की अपील पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद सीबीआई कोर्ट के फैसले को पूरी तरह पलट दिया और तीनों को केस से बरी कर बड़ी राहत दी.