Jharkhand News: झारखंड में पूर्व शराब नीति से जुड़े एक मामले में झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. यह पूरा विवाद विजन हॉस्पिटेलिटी कंपनी से जुड़ा है, जिस पर झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JSBCL) ने करीब 20 करोड़ रूपए कम जमा करने का आरोप लगाया है. इस राशि की वसूली के लिए PDR Act के तहत सर्टिफिकेट केस दर्ज कर कंपनी को नोटिस जारी किया गया है, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.
नोटिस के अधिकार पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कानूनन नोटिस जारी करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को है, JSBCL को नहीं. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते (Agreement) के अनुसार, किसी भी विवाद का निपटारा मध्यस्थता (Arbitration) के जरिए किया जाना चाहिए. इससे पहले हाईकोर्ट ने इस डिमांड पर स्टे (रोक) लगा दिया था.
कोर्ट ने सरकार और JSBCL से पूछे तीखे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान JSBCL ने अपना जवाब दाखिल किया, लेकिन अदालत उसके जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि सर्टिफिकेट अफसर की संतुष्टि के बिना यह नोटिस कैसे जारी किया गया और JSBCL की मांग पर सीधे कार्रवाई कैसे की गई?
21 जुलाई तक बढ़ाई गई रोक
हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को अगली तारीख पर पूरी तैयारी के साथ अपना जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है. तब तक के लिए वसूली के नोटिस पर पहले से जारी स्टे को अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दिया गया है.