RIMS Land Scam: रिम्स के लिए अधिग्रहित मोरहाबादी की सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी भूमि बताकर हस्तांतरित करने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है.
एसीबी ने राज किशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश कुमार झा और चैतन कुमार को आरोपी बनाया है. चारों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. यह कार्रवाई झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज एसीबी थाना कांड संख्या 01/2026 की जांच के आधार पर की गई है.
फर्जी वंशावली और रिकॉर्ड में हेरफेर कर निजी बताई गई जमीन
एसीबी की जांच में आरोप है कि मोरहाबादी में रिम्स के लिए अधिग्रहित करीब 60 डिसमिल सरकारी जमीन को सुनियोजित तरीके से निजी जमीन के रूप में दर्ज कराया गया.
जांच एजेंसी के अनुसार, इसके लिए फर्जी वंशावली तैयार की गई, कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और सरकारी अभिलेखों में हेरफेर की गई. बाद में जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए उसका अवैध हस्तांतरण कराया गया. एसीबी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए के लेन-देन हुए.
1968-69 में रिम्स के लिए अधिग्रहित हुई थी जमीन
मामला मोरहाबादी स्थित खाता संख्या 107 और प्लॉट संख्या 1693 की 60 डिसमिल जमीन से जुड़ा है. जांच के अनुसार यह जमीन वर्ष 1968-69 में रिम्स के लिए अधिग्रहित की गई थी.
मूल रैयत बनारसी दास अरोड़ा को जमीन अधिग्रहण का मुआवजा भी दिया जा चुका था. इसके बावजूद जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कर उसे निजी भूमि के रूप में दिखाने का आरोप है.
दो भाइयों पर फर्जी उत्तराधिकारी बनने का आरोप
चार्जशीट में राज किशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक पर फर्जी वंशावली के आधार पर खुद को मूल रैयत का उत्तराधिकारी बताने का आरोप लगाया गया है.
एसीबी के मुताबिक, जांच में वार्ड पार्षद के नाम से जारी वंशावली को जाली पाया गया. इसी दस्तावेज के आधार पर दोनों भाइयों ने विवादित जमीन का जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराया और बाद में जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई.
भूमि सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य होने का आरोप
राजेश कुमार झा और चैतन कुमार पर इस कथित भूमि सिंडिकेट में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है.
जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों पर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया कराने और अधिग्रहित जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बेचने की साजिश में शामिल होने का आरोप है.
सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण का भी आरोप
एसीबी का कहना है कि सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी लोगों की कथित मिलीभगत से विवादित जमीन पर व्यावसायिक और आवासीय निर्माण भी कराया गया.
जमीन को विवादमुक्त और विश्वसनीय दिखाने के लिए वहां मंदिर बनवाने और एक हिस्से को सरना स्थल के रूप में चिह्नित करने की बात भी जांच में सामने आई है.
चार्जशीट भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में दाखिल की गई है.