Jharkhand Secretariat Employees: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग पर सचिवालय सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण तथा दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है. संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर पदोन्नति, पदस्थापन और सेवा से जुड़े मामलों में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
संघ के पदाधिकारी और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे. हालांकि मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण उनकी मुलाकात नहीं हो सकी. अब संघ के प्रतिनिधि कार्मिक विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो से मिलकर अपनी मांगों को रखेंगे.
संयुक्त सचिव और उप सचिव के पद बढ़ाने की मांग
संघ ने सचिवालय सेवा में संयुक्त सचिव के 24 और उप सचिव के 41 नए पद सृजित करने के प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने की मांग की है. संघ का कहना है कि पदों की कमी के कारण कई अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं.
पत्र में वर्षों से लंबित प्रमोशन प्रक्रिया पूरी करने, योग्य अधिकारियों को नियमित पदों पर पदस्थापित करने और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग भी रखी गई है. संघ के अनुसार, हालिया विभागीय फैसलों से अधिकारियों की करियर प्रगति प्रभावित हो रही है.
APAR को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं होने का आरोप
संघ ने वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन यानी APAR व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उसका कहना है कि सचिवालय सेवा के अधिकारियों के लिए पिछले एक वर्ष से APAR संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. इससे मूल्यांकन और पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
संघ ने मांग की है कि APAR प्रणाली की समीक्षा कर सभी अधिकारियों के लिए समान, पारदर्शी और न्यायसंगत मूल्यांकन व्यवस्था लागू की जाए.
कैबिनेट के संशोधित संकल्प पर आपत्ति
संघ ने 2 जुलाई 2026 को मंत्रिपरिषद से स्वीकृत संकल्प संख्या-3286 में किए गए संशोधनों पर भी आपत्ति जताई है. संघ का आरोप है कि इन बदलावों से सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ असमानता हो सकती है और उन्हें अन्य सेवाओं की तुलना में पदोन्नति के लिए अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी.
एक सप्ताह में निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री से मांगों पर एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक और ठोस निर्णय लेने की अपील की है. संघ ने कहा है कि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो सदस्यों की बैठक बुलाकर लोकतांत्रिक और वैधानिक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी.
संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित विभाग की होगी.