Stock Market: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार, 3 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में खुले। खबर लिखे जाने तक बीएसई सेंसेक्स 376.23 अंक (0.49 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 77,878.35 पर कारोबार कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 124.80 अंक (0.52 प्रतिशत) चढ़कर 24,300.50 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की इस तेजी का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया।
आईटी शेयरों में खरीदारी, HCL Tech सबसे बड़ा गेनर
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल 5 शेयर लाल निशान में रहे। एचसीएल टेक करीब 3.97 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके अलावा बाजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, टीसीएस और टाटा स्टील में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, इंडिगो, एसबीआई और अडानी पोर्ट्स शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे।
मिडकैप में हल्की कमजोरी, स्मॉलकैप में बढ़त
मुख्य सूचकांकों में तेजी के बावजूद बीएसई मिडकैप इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह 16.52 अंक (0.09 प्रतिशत) फिसलकर 18,164.13 पर कारोबार करता दिखा। वहीं बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता रहा। बीएसई पावर इंडेक्स भी लाल निशान में रहा, जहां अधिकांश पावर सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।
एशियाई बाजारों से मिला समर्थन, अमेरिकी बाजार रहे मिले-जुले
वैश्विक बाजारों की बात करें तो टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता सहित अधिकांश एशियाई बाजारों में तेजी रही, जिससे भारतीय बाजार को भी सकारात्मक संकेत मिले। वहीं गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। डाओ जोन्स 1.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
FII की बिकवाली घटी, DII की खरीदारी से बाजार को सहारा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी से बाजार को समर्थन मिल रहा है। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 311.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,784.40 करोड़ रुपये की खरीदारी की। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी को टिकाऊ बनने के लिए मजबूत बुनियादी आर्थिक कारकों का समर्थन जरूरी होगा।