Ranchi News : झारखंड में MSME इकाइयों को कोयला आवंटन नीति के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप सामने आया है। इस संबंध में विश्वनाथ झा ने वित्त विभाग को शिकायत भेजते हुए पूरे मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की है।
कोयला खपत और उत्पादन के आंकड़ों में हेराफेरी का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ MSME इकाइयों ने कोयले की खपत और उत्पादन के आंकड़ों में हेराफेरी की। वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक कई इकाइयों का ऑडिट और प्रभावी निरीक्षण नहीं होने से अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2025-26 में 13 इकाइयों को कोयला आवंटित किया गया, लेकिन इनमें से केवल कुछ इकाइयों ने ही कोयले की बुकिंग कराई, जबकि अन्य इकाइयों के आंकड़ों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
CCL और राज्य सरकार को 170 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
शिकायत के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 4.46 लाख मीट्रिक टन कोयले की बुकिंग का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन केवल 58,850 मीट्रिक टन कोयले की ही बुकिंग हुई। इससे सीसीएल को लगभग 101 करोड़ रुपये, झारखंड सरकार को 38 करोड़ रुपये तथा जीएसटी के रूप में 26 करोड़ रुपये सहित कुल करीब 170 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में वैध माइनिंग चालान के बिना कोयले का परिवहन किया गया। उन्होंने वित्त विभाग, खान विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।