Gamharia News : गम्हरिया में कांग्रेस नेताओं द्वारा अंचल कार्यालय के खिलाफ किए गए धरना-प्रदर्शन के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विरोध प्रदर्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब कांग्रेस झारखंड सरकार में सहयोगी दल है, तो अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ सड़क पर उतरने का क्या संदेश जाता है।
अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप, जवाबदेही को लेकर भी उठे सवाल
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने अंचल कार्यालय के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद यह सवाल भी उठने लगे कि यदि किसी सरकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार है तो उसकी निगरानी और रोकथाम की जिम्मेदारी सरकार की भी होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिना जांच किसी अधिकारी को सार्वजनिक मंच से दोषी ठहराना भी उचित प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
गठबंधन सरकार के भीतर तालमेल पर भी चर्चा

धरने के बाद विपक्ष समेत कई राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा होने के बावजूद विरोध की राह क्यों अपना रही है। इसे लेकर गठबंधन सरकार के भीतर समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जनता अब केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और ठोस परिणाम भी देखना चाहती है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

बिना अनुमति धरना, आयोजकों को नोटिस जारी करने की तैयारी
इस मामले में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अभिनव प्रकाश ने बताया कि धरना-प्रदर्शन के लिए प्रशासन की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने केवल आवेदन दिया था, लेकिन अनुमति जारी नहीं की गई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि बिना अनुमति धरना आयोजित करने, अधिक भीड़ जुटाने और अंचल अधिकारी पर किस आधार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए, इसे लेकर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया जा रहा है। फिलहाल संबंधित अंचल अधिकारी अवकाश पर हैं।