Jamshedpur News: टाटानगर रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों की समयबद्धता लगातार बिगड़ती जा रही है. राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (NTES) के 22 जून से 29 जून 2026 तक के सात दिनों के औसत आंकड़ों ने यात्रियों की बढ़ती परेशानी को उजागर किया है. रिपोर्ट के अनुसार, टाटानगर पहुंचने वाली कई मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, मेमू और पैसेंजर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे की देरी से चल रही हैं. सबसे अधिक प्रभावित चक्रधरपुर–चांडिल–चाईबासा और खड़गपुर–बड़ामपहाड़–रायरंगपुर रेलखंड रहे, जहां कई प्रमुख ट्रेनों की औसत देरी पांच से दस घंटे तक दर्ज की गई. लगातार हो रही लेटलतीफी से यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और स्टेशन पर घंटों इंतजार करना उनकी मजबूरी बन गया है.
चक्रधरपुर–चांडिल–चाईबासा रूट पर सबसे अधिक देरी
इस रेलखंड पर आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही. पिछले सात दिनों में 12872 जूनागढ़ रोड–हावड़ा इस्पात एक्सप्रेस औसतन 10 घंटे 11 मिनट की देरी से टाटानगर पहुंची, जो इस अवधि की सबसे अधिक लेट ट्रेन रही. इसके बाद 20821 पुणे–संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस की औसत देरी 10 घंटे 10 मिनट दर्ज की गई. वहीं 12261 सीएसएमटी–हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस 8 घंटे 44 मिनट, 18478 पुरी–योग नगरी ऋषिकेश पुरी कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस 8 घंटे 20 मिनट, 12129 पुणे–हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस 6 घंटे 4 मिनट तथा 22862 कांटाबांजी–हावड़ा इस्पात एक्सप्रेस 5 घंटे की औसत देरी से टाटानगर पहुंचीं. इसके अलावा सीएसएमटी–हावड़ा मेल, पुणे–हावड़ा दुरंतो, ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस, बिलासपुर–बक्सर सुपरफास्ट और इतवारी–टाटानगर एक्सप्रेस जैसी कई ट्रेनों की औसत देरी भी तीन से चार घंटे के बीच रही.
खड़गपुर–बड़ामपहाड़–रायरंगपुर रूट की ट्रेनों का भी बुरा हाल
इस रेलखंड पर भी ट्रेनों की समयबद्धता प्रभावित रही. 12871 हावड़ा–तिलगढ़ इस्पात एक्सप्रेस पिछले सात दिनों में औसतन 6 घंटे 50 मिनट की देरी से टाटानगर पहुंची. 22861 हावड़ा–जूनागढ़ रोड इस्पात एक्सप्रेस की औसत देरी 6 घंटे 1 मिनट और 18477 पुरी–योग नगरी ऋषिकेश कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की 5 घंटे 13 मिनट दर्ज की गई. इसके अलावा 08611 संतरागाछी–अजमेर स्पेशल 2 घंटे 31 मिनट, 12021 हावड़ा–बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस 1 घंटा 54 मिनट, 12834 हावड़ा–अहमदाबाद एक्सप्रेस 1 घंटा 39 मिनट तथा 12801 पुरी–आनंद विहार पुरुषोत्तम एक्सप्रेस 1 घंटा 22 मिनट की औसत देरी से टाटानगर पहुंचीं. कई अन्य सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी 40 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक की औसत देरी दर्ज की गई.
मेमू और पैसेंजर ट्रेनों पर भी पड़ा असर
केवल लंबी दूरी की ट्रेनें ही नहीं, बल्कि स्थानीय यात्रियों की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेमू और पैसेंजर ट्रेनों की समयबद्धता भी प्रभावित रही. खड़गपुर–टाटानगर पैसेंजर औसतन 1 घंटा 19 मिनट की देरी से चली, जबकि खड़गपुर–टाटानगर मेमू 59 मिनट और टाटानगर मेमू 52 मिनट लेट रही. वहीं चक्रधरपुर रूट पर गुआ–टाटानगर मेमू की औसत देरी 3 घंटे 7 मिनट, पुरुलिया–झाड़ग्राम मेमू 1 घंटा 50 मिनट, झाड़ग्राम–धनबाद मेमू 1 घंटा 29 मिनट और राउरकेला–टाटानगर मेमू 1 घंटा 14 मिनट दर्ज की गई. हालांकि कुछ मेमू ट्रेनों में देरी कुछ मिनटों तक सीमित रही, लेकिन अधिकांश लोकल यात्रियों को भी नियमित रूप से विलंब का सामना करना पड़ा.
यात्रियों की बढ़ी चिंता, समय पर यात्रा बनी चुनौती
एनटीईएस के सात दिनों के औसत आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि टाटानगर पहुंचने वाली ट्रेनों की समयबद्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है. कई प्रमुख ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने के कारण यात्रियों को स्टेशन पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. इसका असर कनेक्टिंग ट्रेनों, कार्यालय जाने वाले यात्रियों, छात्रों और लंबी दूरी की यात्रा करने वालों पर भी पड़ रहा है. रेलवे ने इस रिपोर्ट के साथ देरी के कारणों का उल्लेख नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक ब्लॉक, रखरखाव कार्य, मालगाड़ियों की अधिक आवाजाही और परिचालन संबंधी दबाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं. ऐसे में यात्रियों को स्टेशन के लिए निकलने से पहले अपनी ट्रेन की लाइव स्थिति जांचने की सलाह दी जा रही है.