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  • 2026-06-29

India Missile Strength: अग्नि से ब्रह्मोस तक, जानिए भारत की कौन-कौन सी मिसाइलें बढ़ाती हैं देश की सैन्य ताकत

India Missile Strength: भारत ने पिछले कुछ दशकों में स्वदेशी रक्षा तकनीक के दम पर मिसाइल प्रणाली में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है. आज देश के पास कम दूरी से लेकर अंतरमहाद्वीपीय क्षमता वाली कई आधुनिक मिसाइलें हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करती हैं. इन्हीं उन्नत प्रणालियों ने भारत को वैश्विक सैन्य शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है.
अग्नि और प्रलय से मजबूत हुआ रणनीतिक प्रतिरोध
वर्ष 1983 में शुरू किए गए एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम ने भारत की स्वदेशी मिसाइल क्षमता की नींव रखी. इस कार्यक्रम के तहत विकसित अग्नि मिसाइल श्रृंखला देश की परमाणु प्रतिरोधक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. अग्नि-1 लगभग 700 से 900 किलोमीटर, अग्नि-2 करीब 2,000 किलोमीटर, जबकि अग्नि-3 और अग्नि-4 लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने के लिए विकसित की गई हैं. अग्नि-5 की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक मानी जाती है.


दूसरी ओर, प्रलय मिसाइल को युद्ध के दौरान दुश्मन के सैन्य अड्डों, कमांड सेंटर और रडार प्रतिष्ठानों पर तेजी से हमला करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसकी अनुमानित मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर के बीच है और इसे कम समय में ऑपरेशन के लिए तैनात किया जा सकता है.


ब्रह्मोस, आकाश और नाग की अलग-अलग जिम्मेदारी
भारत और रूस की संयुक्त परियोजना के तहत विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है. यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक रफ्तार से लक्ष्य तक पहुंच सकती है और इसे जमीन, समुद्र तथा वायु तीनों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है. इसकी गति और सटीकता इसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर प्रभावी बनाती है.


वहीं आकाश मिसाइल प्रणाली देश की वायु रक्षा को मजबूत करती है और लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर तथा ड्रोन जैसे हवाई खतरों को रोकने में सक्षम है. इसके अलावा नाग मिसाइल को विशेष रूप से दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है, जिससे जमीनी युद्ध में भारतीय सेना की क्षमता बढ़ती है.


अंतरिक्ष सुरक्षा तक पहुंची भारत की रक्षा क्षमता
भारत ने वर्ष 2019 में सफल एंटी-सैटेलाइट मिशन के जरिए अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रह को निशाना बनाने की अपनी क्षमता का भी प्रदर्शन किया था. इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास अंतरिक्ष सुरक्षा से जुड़ी उन्नत सैन्य तकनीक मौजूद है.


रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और लगातार हो रहे विकास ने भारत की सैन्य शक्ति को नई मजबूती दी है. अग्नि, ब्रह्मोस, प्रलय, आकाश और नाग जैसी मिसाइल प्रणालियां आज देश की सुरक्षा, रणनीतिक संतुलन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता की प्रमुख आधारशिला बन चुकी हैं.
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