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  • 2026-06-28

UP Election 2027: कांग्रेस प्रभारी के "बराबर सीट" वाले दांव से बढ़ी अखिलेश की टेंशन, मायावती की तारीफ के पीछे क्या है गेम प्लान?

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी के सामने उसके सहयोगी दल कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर नई मांग रख दी है. कांग्रेस के नवनियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने गठबंधन में दोनों दलों के बीच बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. इसके साथ ही उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती की भी सराहना की है, जिससे प्रदेश की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह चाहते हैं कि गठबंधन में दोनों दलों की बराबर हिस्सेदारी हो. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीटों को लेकर अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद ही होगा.

2022 के सहयोगी अब सपा के साथ नहीं
विधानसभा चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) और अपना दल (कमेरावादी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. गठबंधन को कुल 125 सीटें मिली थीं. इनमें सपा ने 111, आरएलडी ने 8 और एसबीएसपी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी. अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने सिराथू सीट से जीत हासिल की थी.
हालांकि अब सपा के कई पुराने सहयोगी उसके साथ नहीं हैं. आरएलडी और एसबीएसपी भाजपा के साथ जा चुके हैं, जबकि अपना दल (कमेरावादी) भी सपा से अलग हो चुकी है.

2022 में कांग्रेस और बसपा का प्रदर्शन
विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के नेतृत्व में अकेले चुनाव लड़ा था. पार्टी को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी. बसपा का प्रदर्शन भी कमजोर रहा और उसे भी दो सीटें ही मिली थीं. वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने मिलकर 273 सीटों पर जीत हासिल की थी.

लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिला फायदा
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन किया था. इस चुनाव में सपा ने 36, भाजपा ने 33 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा आरएलडी को 2, आजाद समाज पार्टी और अपना दल को एक-एक सीट मिली थी. बसपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी.



क्या सीट शेयरिंग पर बढ़ेगा सियासी विवाद?
कांग्रेस की बराबर सीटों की मांग को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. विधानसभा चुनाव 2022 में दो सीटों तक सीमित रहने के बावजूद पार्टी की इस मांग को सपा किस नजरिए से देखेगी, इस पर सबकी नजर है. वहीं, कांग्रेस प्रभारी द्वारा मायावती की तारीफ को भी अलग-अलग राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है.

हालांकि सीट बंटवारे को लेकर अंतिम तस्वीर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही साफ होगी. फिलहाल कांग्रेस के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है.
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