Ranchi News : रिम्स की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़ा मामले में मुख्य आरोपी प्रमोद कुमार महतो को अदालत से बड़ा झटका लगा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी जमीन को निजी बताने का आरोप
मामला रिम्स के लिए वर्ष 1964-65 में अधिग्रहीत करीब 9.65 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी वंशावली और अन्य दस्तावेज तैयार कर इस जमीन को निजी संपत्ति के रूप में दर्शाने की साजिश रची। इन कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकानें और मकान तक बना दिए गए।
झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 5 जनवरी 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान एसीबी ने दस्तावेजों की पड़ताल और विभिन्न पक्षों से पूछताछ के बाद कार्रवाई शुरू की।
चार आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
मामले में एसीबी ने 7 अप्रैल 2026 को कार्रवाई करते हुए राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
प्रमोद कुमार महतो की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद एसीबी अब मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।