जमशेदपुर के कई थानों में दर्ज हैं 9 आपराधिक मामले
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक दिनकर कच्छप के खिलाफ शहर के अलग-अलग थानों में कुल 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें बिष्टुपुर, सीतारामडेरा, गोलमुरी और मानगो (एमजीएम) थाना क्षेत्र से जुड़े मामले शामिल हैं। इन मामलों में विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, अवैध जमावड़ा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रावधान शामिल बताए जाते हैं।
2020 से 2025 तक कई केस दर्ज होने का रिकॉर्ड
जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ वर्ष 2020 से 2025 के बीच अलग-अलग घटनाओं को लेकर कई केस दर्ज हुए हैं। इनमें सीतारामडेरा थाना में 2020 और 2023 के मामले, गोलमुरी थाना का 2023 का मामला, बिष्टुपुर थाना के 2024 और 2025 के मामले तथा एमजीएम (मानगो मुफस्सिल) थाना क्षेत्र से जुड़े 2024 के दो मामले शामिल हैं।
कानूनी धाराओं में गंभीर आरोप भी शामिल
दर्ज मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के साथ-साथ झारखंड उत्पाद अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम, महामारी रोग अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं। कुछ मामलों में ऐसी धाराएं भी लगी हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर 7 साल या उससे अधिक सजा का प्रावधान है।
गैर-जमानती वारंट के आधार पर कार्रवाई
पुलिस सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से लंबित गैर-जमानती वारंट के निष्पादन के तहत यह गिरफ्तारी की गई है। फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी हुई है और मामले की जांच जारी है। दिनकर कच्छप का नाम पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी चर्चा में रहा है। समर्थक उन्हें आदिवासी अधिकारों की आवाज बताते हैं, जबकि विरोधी उन पर आंदोलनों के दौरान दबाव बनाने और प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने जैसे आरोप लगाते रहे हैं।
सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी चर्चा
उन पर यह भी आरोप लगते रहे हैं कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपने अभियानों को बढ़ावा देते हैं और कई मामलों में वीडियो व ऑनलाइन अभियानों का सहारा लिया जाता है। हालांकि, इन आरोपों पर उनकी ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पूर्व में भी कुछ घटनाओं जैसे हथियाडीह प्रकरण और कांड्रा पावर ग्रिड विवाद में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा रही है। हालांकि, इन मामलों की कानूनी स्थिति अलग-अलग समय पर न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रही है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और अन्य दस्तावेजों तथा वारंट से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। आधिकारिक बयान आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।