Jamshedpur News: जमशेदपुर के भालूबासा में करीब एक दशक पहले सड़क चौड़ीकरण के कारण उजाड़े गए दुकानदारों के पुनर्वास का मामला एक बार फिर गरमा गया है। जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू की सक्रियता के बाद सालों से लंबित इस योजना में तेजी आई है। हाल ही में क्षेत्र से छह और दुकानों को हटाए जाने के बाद प्रशासन ने दुकान आवंटन की प्रक्रिया को रफ्तार दी है, जिससे लंबे समय से भटक रहे प्रभावित दुकानदारों में अपने रोजगार को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।
रघुवर दास के कार्यकाल में बनीं 53 दुकानें, सत्ता बदलते ही अधर में लटका आवंटन
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में भालूबासा पुल के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान बड़ी संख्या में दुकानें हटाई गई थीं। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की पहल पर विस्थापितों के लिए करोड़ों की लागत से 53 नई दुकानों का निर्माण कराया गया था। शुरुआत में 24 दुकानों का आवंटन तो हुआ, लेकिन उसके बाद सत्ता परिवर्तन होते ही शेष दुकानों का मामला अधर में लटक गया। देखरेख और रख-रखाव न होने के कारण बंद पड़ी ये सरकारी दुकानें धीरे-धीरे जर्जर होने लगीं।
बिजली-पानी के बिना जर्जर हुईं दुकानें, कनेक्शन के नाम पर 20-20 हजार मांगने का आरोप
विस्थापित दुकानदारों का कहना है जिन्हें पूर्व में दुकानें आवंटित की भी गईं, वहां प्रशासन बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देना भूल गया। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में आज 24 में से तीन-चार दुकानें ही चालू स्थिति में हैं। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि अब प्रशासन उनसे बिजली-पानी का कनेक्शन देने के एवज में 20-20 हजार रुपये की मांग कर रहा है, जो सालों से बेरोजगार बैठे गरीब व्यवसायियों के लिए चुका पाना मुमकिन नहीं है।
स्थापितों को तुरंत मिले दुकान, बिजली और पानी
इस गंभीर समस्या को देखते हुए विधायक पूर्णिमा साहू ने जमशेदपुर अक्षेस (JACM) के अधिकारियों के साथ बैठक कर नए विस्थापितों को तुरंत दुकान देने और पुरानी दुकानों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा है कि दुकानों में बिजली-पानी की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए। चार दशकों से इसी इलाके में रोजी-रोटी कमा रहे दुकानदारों का कहना है कि अगर वादे के मुताबिक सुविधाएं मिल गईं, तो दर्जनों परिवारों के सामने खड़ा आजीविका का संकट हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।