PM Modi US Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में हुई अहम प्रगति का भारत ने स्वागत किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच बनी सहमति को वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम बताया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होंगे और दुनिया को आर्थिक अस्थिरता से राहत मिलेगी.
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने को लेकर पीएम मोदी ने जाहिर की उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी टकराव की वजह से कई देशों में जानमाल का नुकसान हुआ और वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई. पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि इस सहमति के अमल में आने से व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी और स्थायी शांति की दिशा में रास्ता खुलेगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की पुष्टि करते हुए साझा की बड़ी जानकारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि ईरान के साथ 14 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है. इस समझौते का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी देखने को मिल सकता है.
ट्रंप के मुताबिक, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का फैसला लिया गया है. इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
जिनेवा में 19 जून को होगा आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह
अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति को औपचारिक रूप देने के लिए 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा. अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो करीब 47 वर्षों में वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह पहली उच्च स्तरीय बैठक होगी.
अंतरराष्ट्रीय हलकों में इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक पहल माना जा रहा है. माना जा रहा है कि दोनों देश अब सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति के रास्ते को प्राथमिकता देना चाहते हैं.
ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें, फ्रीज फंड जारी करने की मांग
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने साफ किया है कि स्थायी शांति के लिए अमेरिका को कुछ अहम कदम उठाने होंगे. उन्होंने कहा कि नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त की जानी चाहिए, सभी सैन्य गतिविधियां रोकी जानी चाहिए और ईरान की रोकी गई संपत्तियों को जारी किया जाना चाहिए.
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने करीब 12 अरब डॉलर की राशि जारी करने और तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों को पूरी तरह हटाने की मांग भी रखी है.
तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है बड़ा असर
इस समझौते से दुनिया भर के देशों को काफी उम्मीदें हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति सफलतापूर्वक लागू होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है. इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के दूर होने की भी संभावना है. भारत समेत कई देशों के लिए यह समझौता आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया की स्थिरता का सीधा असर ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है.
अमेरिका और ईरान के बीच बनी यह सहमति सिर्फ दो देशों के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. भारत ने इस पहल का स्वागत करते हुए शांति और स्थिरता की उम्मीद जताई है. यदि प्रस्तावित समझौता तय समय पर अंतिम रूप लेता है, तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई मजबूती मिल सकती है. साथ ही पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.