Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले में रेत खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सोमवार सुबह कांड्रा टोल प्लाजा के निकट गीली रेत से लदे ओवरलोड हाईवा वाहनों को गुजरते देखा गया। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के तहत गर्मी के मौसम में रेत खनन पर रोक लागू है। स्थानीय लोगों के अनुसार भीषण गर्मी और लगातार गिरते जलस्तर को देखते हुए नदियों से रेत खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद गीली रेत से भरे वाहनों का सड़कों पर दौड़ना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि खनन पूरी तरह बंद है, तो फिर इतनी मात्रा में गीली रेत आखिर कहां से लाई जा रही है।
ओवरलोड हाईवा ने बढ़ाई शंका
कांड्रा टोल प्लाजा के समीप JH22k-3928,JH02BU-3834 हाईवा वाहनों को देखा गया, उनमें क्षमता से अधिक रेत लदी होने की बात सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वाहनों में मौजूद रेत की स्थिति देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि रेत हाल ही में किसी नदी क्षेत्र से निकाली गई हो सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता जांच का विषय है। बता दें कि इन दिनों क्षेत्र का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और अधिकांश नदियों का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। पर्यावरण संरक्षण और नदी तंत्र को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एनजीटी ने रेत खनन गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। ऐसे में गीली रेत के परिवहन की तस्वीरें और वीडियो सामने आने से प्रशासनिक निगरानी और नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि खनन प्रतिबंध के बावजूद अवैध तरीके से रेत निकासी और परिवहन हो रहा है, तो इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। फिलहाल गीली रेत के परिवहन को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रेत का स्रोत क्या है और परिवहन नियमों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं। जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्रवाई पर अब लोगों की नजर टिकी हुई है।