देर रात घर के पास पहुंचे हाथी ने तोड़ दी दीवार
मिली जानकारी के अनुसार लावा गांव की रहने वाली चंपा सिंह मुंडा गुरुवार रात अपने घर में सो रही थीं. देर रात घर के बाहर कुछ हलचल महसूस होने पर उनकी नींद खुली. बाहर निकलकर देखने पर उन्होंने घर के पास एक जंगली हाथी को देखा, जिससे वह घबरा गईं.
इसी दौरान हाथी ने घर की दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया और उन पर हमला कर दिया. हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा वन विभाग
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हाथी जंगल की ओर लौट चुका था. सूचना मिलने पर चांडिल वन क्षेत्र का हाथी भगाओ दल और वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची.
वन विभाग ने रात में ही शव को अपने कब्जे में लेकर ईचागढ़ थाना परिसर में सुरक्षित रखवाया.
परिजनों को दी गई तत्काल सहायता राशि
शुक्रवार सुबह वन विभाग की ओर से मृतका के आश्रितों को तत्काल सहायता के तौर पर 50 हजार रुपये दिए गए. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शेष 3 लाख 50 हजार रुपये की मुआवजा राशि आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों को प्रदान की जाएगी. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया.
तीन महीने में सात मौतों से बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
चांडिल वन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हाथियों की गतिविधियां प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं. पिछले तीन महीनों में हाथियों के हमलों में सात लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर स्थिति सामने आई है.
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के डर से उन्हें रातभर जागकर पहरा देना पड़ रहा है. गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग अंधेरा होने के बाद घरों से निकलने से भी बच रहे हैं.
लोगों से सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि रात के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें. यदि कहीं हाथी दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें.
फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए हाथी भगाओ दल को प्रभावित इलाके में तैनात किया गया है.
चांडिल वन क्षेत्र में लगातार हो रही जनहानि ने हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को गंभीर मुद्दा बना दिया है. स्थानीय लोगों की सुरक्षा और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक उपायों की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि ग्रामीणों में व्याप्त भय का माहौल कम हो सके.