Darjeeling: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-10 (NH-10) पर हुए एक बड़े सड़क हादसे में लापता परिवार के 4 सदस्यों की मौत हो गई है। गंगटोक से सिलीगुड़ी जा रहे इस परिवार की कार अनियंत्रित होकर तीस्ता नदी में गिर गई थी। प्रशासन और विभिन्न बचाव एजेंसियों द्वारा चलाए गए कई घंटों के तलाशी अभियान के बाद नदी से कार और उसमें सवार एक मासूम बच्ची सहित 4 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। प्रारंभिक तौर पर भारी बारिश, भूस्खलन और सड़क की खराब स्थिति को इस हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
अस्पताल में भर्ती रिश्तेदारों से मिलने जा रहा था परिवार
मिली जानकारी के अनुसार, पूर्वी सिक्किम के काबी लुंगचोक (लिंगडोक) क्षेत्र का रहने वाला यह परिवार 5 जून को सिलीगुड़ी के लिए रवाना हुआ था। परिवार के सदस्य सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती अपने बीमार रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे। बताया गया है कि 5 जून की शाम राम्बी क्षेत्र के पास परिवार का आखिरी बार संपर्क हुआ था, जिसके बाद से उनका मोबाइल बंद आ रहा था। काफी खोजबीन के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी।
कार के मलबे से मिला सुराग, तीस्ता नदी में चला सर्च ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पश्चिम बंगाल पुलिस और स्थानीय बचाव दलों ने संयुक्त रूप से खोज अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान बाघपुल क्षेत्र के पास भूस्खलन प्रभावित हिस्से में कार का बंपर और बैटरी बरामद हुई। इन सुरागों के मिलने के बाद बचाव दलों को कार के तीस्ता नदी में गिरने की आशंका हुई और नदी के भीतर सर्च ऑपरेशन तेज किया गया। शनिवार शाम को नदी में डूबी कार का पता चल गया था, लेकिन भारी बारिश, तेज बहाव और अंधेरे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा। इसके बाद रविवार सुबह कार तक पहुँचकर चारों शवों को बाहर निकाला गया।
मृतकों में 3 सरकारी कर्मचारी शामिल
इस दुखद हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान स्मारिका न्यौपाने (28 वर्ष), सैब्या न्यौपाने (27 वर्ष), जीका दहल (27 वर्ष) और 5 वर्षीय दित्या छेत्री के रूप में हुई है। मृतकों में शामिल तीनों वयस्क सरकारी सेवा से जुड़े थे। स्मारिका न्यौपाने एसटीएनएम अस्पताल में नर्सिंग लेक्चरर थीं, सैब्या न्यौपाने संस्कृति विभाग में जूनियर इंजीनियर थीं और जीका दहल बागवानी विभाग में कार्यरत थे।
एनएच-10 की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने सिक्किम और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाले जीवन रेखा माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-10 की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मार्ग पर बरसात के मौसम में भूस्खलन और सड़क धंसने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बैरिकेडिंग और समय पर मरम्मत कार्य किया जाना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।