West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है। 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई पार्टी को विधानसभा में सिर्फ 80 सीटें मिलीं, जिसके बाद अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
58 विधायकों ने किया विद्रोह, नया नेता भी चुना
टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बागी विधायकों ने संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बनाते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नेता चुन लिया, जिसे स्पीकर ने भी मान्यता दे दी है।
अब सांसदों की बगावत की अटकलें तेज
विधायकों के बाद अब सांसदों के भी बागी गुट के साथ जाने की चर्चा है। खबरें हैं कि टीएमसी के 23 सांसद बागी खेमे के संपर्क में हैं। इससे पहले कुछ सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, जिससे पार्टी नेतृत्व की चिंता और बढ़ गई है।
ऋतब्रत के बयान ने बढ़ाया सस्पेंस
बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने सांसदों के भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि “थोड़ा धैर्य रखिए, अभी बहुत कुछ हो सकता है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले सात दिनों में उनकी किसी सांसद से बात नहीं हुई है, इसलिए वे उनके अगले कदम पर टिप्पणी नहीं कर सकते।
दल-बदल कानून के गणित पर टिकी नजर
लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। अलग गुट को दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 19 सांसदों का समर्थन चाहिए होगा। वहीं राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं, जहां अलग गुट की मान्यता के लिए नौ सांसदों का साथ जरूरी माना जा रहा है।
कालीघाट में ममता की बड़ी बैठक, रणनीति पर मंथन
बढ़ते संकट के बीच ममता बनर्जी अब डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई हैं। उन्होंने कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी को टूट से बचाने, संगठन को संभालने और टीएमसी के नाम-निशान पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।