Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उथलपुथल लगातार गहराती नजर आ रही है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के सामने अब आंतरिक असंतोष बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है. बागी विधायक गुट के सक्रिय होने के बाद अब ऐसी चर्चाएं तेज हैं कि TMC के 23 सांसद भी अलग खेमे के संपर्क में हैं. इन अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित अपने कालीघाट आवास पर वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है.
विधायकों की बगावत के बाद अब सांसदों को लेकर बढ़ी चिंता
हालिया विधानसभा चुनाव में TMC को केवल 80 सीटों पर जीत मिली थी. इसके बाद पार्टी को बड़ा झटका तब लगा जब 80 में से 58 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ खड़े हो गए. बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नेता चुना, जिसे विधानसभा अध्यक्ष की ओर से मान्यता भी मिल चुकी है.
अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद भी इसी राह पर चल सकते हैं. सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं.
ऋतब्रत बनर्जी के बयान से बढ़ा सस्पेंस
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऋतब्रत बनर्जी से TMC सांसदों के संभावित कदम को लेकर सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि पिछले सात दिनों में उनकी किसी सांसद से बात नहीं हुई है, इसलिए वह यह नहीं कह सकते कि आगे कौन क्या फैसला लेगा.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं. उनके इस बयान के बाद सांसदों की संभावित बगावत को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.
सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलें क्यों हो रही हैं
मीडिया रिपोर्ट्स में TMC सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कुछ सांसद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नाराज हैं. बताया जा रहा है कि इन सांसदों की नाराजगी खास तौर पर अभिषेक बनर्जी को लेकर है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि विधायक गुट की तरह सांसद भी अलग समूह बनाने का प्रयास कर सकते हैं.
दल बदल कानून के लिहाज से क्या है गणित
लोकसभा में TMC के कुल 28 सांसद हैं. ऐसे में दल बदल कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए किसी भी अलग गुट को कम से कम 19 सांसदों का समर्थन चाहिए होगा. वहीं राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं और वहां अलग गुट को मान्यता मिलने के लिए नौ सांसदों का समर्थन जरूरी माना जाता है.
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि सांसदों के बीच चल रही गतिविधियों के पीछे पार्टी का एक वरिष्ठ सांसद सक्रिय भूमिका निभा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
संकट के बीच एक्शन मोड में आई ममता बनर्जी
पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल के बीच ममता बनर्जी ने शुक्रवार शाम चार बजे कालीघाट स्थित अपने आवास पर बड़ी बैठक बुलाई है. इस बैठक में TMC के लगभग सभी प्रमुख नेताओं को शामिल होने के लिए कहा गया है.
माना जा रहा है कि बैठक में पार्टी को एकजुट रखने, बगावत से निपटने और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी.
पार्टी के नाम और पहचान को लेकर भी बढ़ी चुनौती
सियासी संकट केवल विधायकों और सांसदों तक सीमित नहीं है. पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम के बीच अब TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. करीब 28 वर्ष पहले स्थापित की गई पार्टी की पहचान को बरकरार रखना भी ममता बनर्जी के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC जिस आंतरिक संकट से गुजर रही है, वह अब नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. पहले विधायकों की बगावत और अब सांसदों के अलग होने की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में ममता बनर्जी की बुलाई गई बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यही बैठक TMC की आगे की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है.