Dhalbhumgarh Airport Jamshedpur: जमशेदपुर के लोगों का हवाई सफर का सपना अब जल्द ही पूरा होने वाला है. धालभूमगढ़ एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर चल रही प्रशासनिक और पर्यावरण से जुड़ी सभी बड़ी रुकावटें खत्म हो गई हैं. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) अब 100 हेक्टेयर जमीन पर इस प्रोजेक्ट के पहले फेज (Phase 1) का काम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है. मैंगो गेस्ट हाउस में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो और वन विभाग के अधिकारियों ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है.
बांस के चक्कर में फंसा था प्रोजेक्ट
डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सबा आलम अंसारी ने बताया कि पहले फेज की जमीन और पर्यावरण रिपोर्ट तैयार करके दिल्ली भेज दी गई है, जहां से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा. सांसद विद्युत वरण महतो ने एक खुलासा करते हुए बताया कि एक पुराने सर्वे की गलती की वजह से यह प्रोजेक्ट अटक गया था. दरअसल, सर्वे में बांस के पौधों को पेड़ मान लिया गया था, जबकि सरकारी नियमों के मुताबिक बांस घास की केटेगरी में आता है. इसे काटने या हटाने पर वन संरक्षण का कोई कानून नहीं टूटता.
3 राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा
जमशेदपुर से महज 55 किलोमीटर दूर बनने वाला यह एयरपोर्ट झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. अभी जमशेदपुर के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए ढाई घंटे का सफर तय करके रांची जाना पड़ता है, लेकिन इस एयरपोर्ट के बनने से यह दूरी सिर्फ 1 घंटे की रह जाएगी. इससे झारखंड के घाटशिला, चाईबासा के साथ-साथ ओडिशा के बारीपदा और बंगाल के पुरुलिया-झारग्राम जैसे सीमावर्ती इलाकों को भी बेहतरीन और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी.
75 हजार रोजगार और नया शहर
यह प्रोजेक्ट पूरे इलाके की किस्मत बदलने वाला साबित होगा. पहले फेज में देवशोल, कोकपारा और बुरुडीह समेत 5 गांवों की करीब 100 हेक्टेयर जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. सांसद के मुताबिक, इस एयरपोर्ट के शुरू होने से सैकड़ों पक्की सरकारी नौकरियां मिलेंगी और करीब 75,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के मौके पैदा होंगे. यही नहीं, प्रशासन जमशेदपुर-धालभूमगढ़ कॉरिडोर पर एक नया औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की भी प्लानिंग कर रहा है.