Ranchi News : रिम्स की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े चर्चित फर्जीवाड़ा मामले में जेल में बंद आरोपी राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। एसीबी की विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत इस मामले में 6 जून को अपना आदेश सुनाएगी।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए रिम्स की जमीन पर दावा करने का आरोप
यह मामला रिम्स की अधिग्रहीत जमीन को फर्जी दस्तावेजों और कथित जाली वंशावली के आधार पर निजी संपत्ति दिखाने से जुड़ा है। झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 5 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान एसीबी ने 7 अप्रैल 2026 को कार्रवाई करते हुए राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि सभी आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी वंशावली तैयार कर रिम्स की जमीन पर निजी स्वामित्व का दावा करने का प्रयास किया।
करीब 9.65 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला
एसीबी के अनुसार यह मामला वर्ष 1964-65 में अधिग्रहीत की गई लगभग 9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकानें और मकान बना लिए गए थे। जांच एजेंसी इस पूरे प्रकरण में दस्तावेजों की वैधता और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।
फिलहाल अदालत में दोनों आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब 6 जून को आने वाले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। मामले को राज्य के चर्चित भूमि घोटालों में से एक माना जा रहा है।