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  • 2026-05-31

Seraikela News: ईचा-खरकई परियोजना के डूब क्षेत्र का हवाला देकर वर्षों से रोका विकास! हेरमा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित हेरमा पंचायत के ग्रामीणों में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के 75 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद हेरमा समेत आसपास के कई गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं और सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं।

ईचा-खरकई परियोजना के कारण रुका विकास
ग्रामीणों के अनुसार, ईचा-खरकई डैम परियोजना के तहत हेरमा और आसपास के कई गांवों को डूब क्षेत्र घोषित किया गया था। इसके बाद से इन क्षेत्रों में विकास कार्य लगभग ठप हो गए। लोगों का कहना है कि डूब क्षेत्र का हवाला देकर वर्षों से उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से दूर रखा जा रहा है।

अन्य डूब क्षेत्र के गांवों में मिल रही योजनाओं का लाभ
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि इसी परियोजना के अंतर्गत आने वाले अन्य कई डूब क्षेत्र के गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, हर घर नल-जल योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। जबकि हेरमा और आसपास के कई गांव आज भी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

ग्राम प्रधान ने जताई नाराजगी
हेरमा गांव के ग्राम प्रधान दासकन कुदादा ने कहा कि गांव के लोगों को आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में हो रहे भेदभाव से ग्रामीणों में गहरा असंतोष है।

आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। साथ ही ग्रामीणों ने वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब एक ही परियोजना के अंतर्गत आने वाले अन्य डूब क्षेत्र के गांवों में विकास कार्य कराए जा सकते हैं, तो हेरमा और आसपास के गांवों को सरकारी योजनाओं से क्यों वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब और समान विकास की मांग की है।

सरकार और प्रशासन से न्याय की उम्मीद
फिलहाल हेरमा समेत आसपास के गांवों के लोग अपनी समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों की शुरुआत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और उन्हें उनके अधिकार तथा बुनियादी सुविधाएं कब तक उपलब्ध कराई जाती हैं।
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