Bihar News: बिहार के कटिहार जिले के फलका प्रखंड स्थित मोरसंडा गांव से विकास के दावों को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गांव निवासी अरविंद मंडल के निधन के बाद परिजन और ग्रामीण उनके शव को कंधे पर उठाकर कमला नदी पार करने को मजबूर हुए। पुल नहीं होने के कारण लोगों ने लगभग तैरते हुए नदी पार की और दूसरी ओर जाकर अंतिम संस्कार किया।
जान जोखिम में डालकर नदी पार करते ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या वर्षों पुरानी है। आजादी के दशकों बाद भी गांव को नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला पुल नसीब नहीं हुआ है। नतीजतन, लोगों को या तो कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है या फिर जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
ओवरलोड नाव से खतरा, पानी में उतरना बनती है मजबूरी
स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी पार करने के लिए एक निजी नाव की व्यवस्था है, लेकिन ओवरलोडिंग और सुरक्षा के अभाव के कारण कई बार हादसे होते-होते बचे हैं। इसी वजह से अधिकांश ग्रामीण नाव का उपयोग करने से भी कतराते हैं और मजबूरी में पानी के बीच से होकर आवागमन करते हैं।
बाढ़ में चचरी पुल सहारा, बाकी दिनों में नदी ही रास्ता
बाढ़ के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। ग्रामीण आपसी सहयोग और चंदा जुटाकर अस्थायी चचरी पुल बनाते हैं ताकि आवागमन जारी रह सके। वर्तमान में नदी में पानी कम होने के कारण लोग पैदल और पानी में उतरकर ही एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचते हैं।
विधायक का दावा-जल्द शुरू होगा पुल निर्माण कार्य
इस मामले पर कोढ़ा विधानसभा की भाजपा विधायक कविता पासवान ने कहा कि वह पहले भी विधानसभा में इस पुल की मांग उठा चुकी हैं। उनके अनुसार जिला स्तर पर योजना संबंधी खामियों के कारण पुल निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण कार्य को जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। विकास और बुनियादी सुविधाओं के दावों के बीच नदी में अर्थी लेकर उतरने को मजबूर ग्रामीणों की यह तस्वीर आज भी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।