Railway Update: तेज रफ्तार ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को लेकर दक्षिण पूर्व रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. रेलवे अब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली ट्रेनों के लिए विशेष रूप से चयनित लोको पायलटों की टीम तैयार कर रहा है. इस पहल के तहत टाटानगर समेत चक्रधरपुर मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर कार्यरत वरिष्ठ लोको पायलटों की साइको जांच शुरू कर दी गई है, ताकि हाई स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए उनकी मानसिक तैयारी और कार्य क्षमता का आकलन किया जा सके.
हाई स्पीड ट्रेनों के लिए मानसिक दक्षता की हो रही जांचरेलवे ने गार्डेनरीच स्थित केंद्रों में आधुनिक तकनीक से लैस टेस्ट लैब स्थापित की हैं, जहां कंप्यूटर आधारित मनोवैज्ञानिक परीक्षण किए जा रहे हैं. इन जांचों के माध्यम से लोको पायलटों की मानसिक सतर्कता, निर्णय लेने की क्षमता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने की योग्यता को परखा जा रहा है. रेलवे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेज रफ्तार ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सक्षम और प्रशिक्षित चालक ही करें.
साइको टेस्ट पास करने के बाद ही मिलेगी जिम्मेदारी
रेलवे अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाने वाले लोको पायलटों को भी इस प्रक्रिया से गुजरना होगा. परीक्षण में सफल होने के बाद ही उन्हें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली ट्रेनों के संचालन की अनुमति दी जाएगी.
जानकारी के अनुसार टाटानगर के करीब पांच दर्जन लोको पायलटों सहित राउरकेला, झारसुगुड़ा और चक्रधरपुर लॉबी के 130 से अधिक लोको पायलटों की जांच पूरी हो चुकी है. इस प्रक्रिया में सफल रहने वाले चालक वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो और अन्य हाई स्पीड ट्रेनों के संचालन के लिए पात्र माने जाएंगे.
अत्याधुनिक लैब में परखी जा रही निर्णय लेने की क्षमता
रेलवे के मनोवैज्ञानिक विभाग और अस्पतालों में विकसित आधुनिक लैब में लोको पायलटों की विभिन्न मानसिक क्षमताओं का मूल्यांकन किया जा रहा है. कंप्यूटर आधारित इस परीक्षण के जरिए यह जांचा जा रहा है कि चालक किसी आपात स्थिति में कितनी तेजी और सटीकता के साथ निर्णय ले सकता है.
रेलवे का मानना है कि इस तरह की जांच से दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और सिग्नल पासिंग जैसी गंभीर घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा. इससे यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को भी अतिरिक्त मजबूती मिलेगी.
बिलासपुर हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को किया गया और सख्त
रेलवे बोर्ड ने नवंबर 2025 में बिलासपुर मंडल में मेमू ट्रेन और मालगाड़ी के बीच हुई टक्कर के बाद सुरक्षा मानकों की समीक्षा की थी. इसके बाद रेल संचालन से जुड़े कई नियमों को और कड़ा करने का फैसला लिया गया.
इसी क्रम में मालगाड़ी से पदोन्नत होकर मेमू और एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन करने वाले लोको पायलटों के लिए भी साइको जांच अनिवार्य कर दी गई है. रेलवे का मानना है कि बढ़ती रफ्तार के इस दौर में केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है, बल्कि चालक की मानसिक सतर्कता और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है.
एकाग्रता और तनाव में काम करने की क्षमता पर विशेष फोकस
साइको जांच के दौरान लोको पायलटों की एकाग्रता, मानसिक सजगता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और दबावपूर्ण परिस्थितियों में काम करने की योग्यता का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है. रेलवे चाहता है कि हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन ऐसे चालक करें जो हर परिस्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे सकें.