Ranchi News : झारखंड पुलिस के कुछ अधिकारियों पर लगे यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोपों ने एक बार फिर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ वर्षों में DSP से लेकर दारोगा स्तर तक के कई अधिकारियों पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, यौन शोषण करने और जबरन गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। कई मामलों में गिरफ्तारी और विभागीय कार्रवाई भी हुई है।
DSP अमित कुमार पर युवती ने दर्ज कराया मामला
ताजा मामला लोहरदगा में पदस्थापित DSP अमित कुमार सिंह से जुड़ा है। रांची के चुटिया थाना में दर्ज प्राथमिकी में 25 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि DSP ने शादी का झूठा वादा कर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया। पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान उसका जबरन गर्भपात भी कराया गया और विरोध करने पर धमकियां दी गईं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
देवरी थाना प्रभारी रहे गौरव कुमार गए थे जेल
गिरिडीह जिले के देवरी थाना प्रभारी रहे गौरव कुमार पर भी रांची की एक युवती ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। शिकायत की जांच के बाद दिसंबर 2020 में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। गौरव कुमार को थाना प्रभारी बने महज 25 दिन ही हुए थे, जब उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।
इंस्टाग्राम से हुई पहचान, दारोगा पर लगा शोषण का आरोप
जुलाई 2025 में सिमडेगा के वायरलेस कार्यालय में पदस्थापित दारोगा रमेश भारती के खिलाफ भी महिला थाना में मामला दर्ज हुआ। आरोप है कि इंस्टाग्राम के माध्यम से युवती से संपर्क हुआ और बाद में शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए गए। बाद में शादी से इनकार करने पर मामला दर्ज कराया गया।
शशांक कुमार मामला भी रहा चर्चा में
रांची के लालपुर थाना में पदस्थापित रहे दारोगा शशांक कुमार पर भी शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगा था। मामले की जांच CID को सौंपी गई थी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाद में शशांक कुमार ने आत्महत्या कर ली। हालांकि आत्महत्या के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
कई अन्य अधिकारियों के नाम भी आए सामने, पुलिस व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
पिछले वर्षों में स्पेशल ब्रांच के दारोगा गुंदीप कुमार, जमशेदपुर के बहरागोड़ा थाना में पदस्थापित रहे दारोगा रवि रंजन, हजारीबाग के दारोगा अनिल और धनबाद के बलियापुर थाना में पदस्थापित दारोगा मोहन मरांडी पर भी यौन शोषण या दुष्कर्म के आरोप लग चुके हैं। वहीं फरवरी 2021 में शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने के आरोप में हजारीबाग में पदस्थापित एक सार्जेंट को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने झारखंड पुलिस की छवि को प्रभावित किया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों पर इस तरह के आरोप लगने से विभाग की साख पर भी असर पड़ा है। इन घटनाओं ने पुलिस तंत्र में अनुशासन, निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता को उजागर किया है।