Jharkhand Politics: भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरना और सनातन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस और झामुमो पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया. प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद भी मौजूद रहे.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू परंपराओं के बीच मूल रूप से कोई अलगाव नहीं है. उनके अनुसार सभी परंपराएं प्रकृति पूजा और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ी हैं, जहां पेड़-पौधों, जल, धरती, पहाड़ और अन्य प्राकृतिक तत्वों का सम्मान किया जाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड की जनजातीय परंपराएं भी इसी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं.
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय से समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने की राजनीति करती रही है. उन्होंने दावा किया कि अंग्रेजों के दौर में कांग्रेस की भूमिका एक “सेफ्टी वाल्व” की तरह रही थी. साथ ही उन्होंने कहा कि आजादी के बाद महात्मा गांधी ने कांग्रेस को समाप्त करने की बात कही थी, लेकिन सत्ता की राजनीति के कारण ऐसा नहीं हो सका.
धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर मरांडी ने कहा कि हिंदू समाज में शामिल होने के लिए किसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती, जबकि अन्य धर्मों में धर्मांतरण की अलग व्यवस्था है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के धर्म परिवर्तन के मामलों पर कांग्रेस और झामुमो चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन भाजपा को निशाना बनाया जाता है.
उन्होंने राज्य सरकार पर पेसा कानून की नियमावली में बदलाव कर पारंपरिक आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने का आरोप भी लगाया. मरांडी ने कहा कि सरकार को सरना, मसना, हरगड़ी और पहनाई जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की जमीन को अतिक्रमण और भू-माफियाओं से सुरक्षित रखना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासनकाल में इन आस्था स्थलों के संरक्षण, घेराबंदी और विकास को लेकर कई पहल की गई थीं.