Jharkhand News: झारखंड में खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के बेहतर और दीर्घकालिक उपयोग पर जोर दिया गया है. टास्क फोर्स-सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन और सीड की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि डीएमएफ को केवल मुआवजा और आधारभूत सुविधाओं तक सीमित न रखकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव के मजबूत साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 तक राज्य में डीएमएफ के तहत 18,231 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं, जो देश के कुल संग्रह का 16.3 प्रतिशत हिस्सा है. इसमें सबसे बड़ा योगदान कोयला खनन क्षेत्रों का है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अब तक बड़ी राशि खर्च नहीं हो सकी है और करीब 8,434 करोड़ रुपये शेष हैं. धनबाद, पश्चिमी सिंहभूम, चतरा, रामगढ़, बोकारो और हजारीबाग जैसे जिलों के पास कुल फंड का बड़ा हिस्सा मौजूद है.
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि डीएमएफ राशि का उपयोग रोजगार सृजन, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में किया जाए. उनका मानना है कि सही योजना और पारदर्शिता के जरिए खनन प्रभावित इलाकों में स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है.
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबुबकर सिद्दीकी पी. ने कहा कि डीएमएफ स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सकता है. उन्होंने कहा कि यदि इस फंड का उपयोग दूरदर्शी रणनीति के साथ किया जाए, तो खनन प्रभावित जिलों को भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा.
टास्क फोर्स के अध्यक्ष ए.के. रस्तोगी ने कहा कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के नए दिशा-निर्देशों से डीएमएफ की भूमिका और मजबूत हुई है. वहीं खनन निदेशक राहुल कुमार सिन्हा ने कहा कि इस फंड को स्थानीय जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित समुदाय आत्मनिर्भर बन सकें.
रिपोर्ट जारी करने के दौरान कई विशेषज्ञ, नीति सलाहकार और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे.