Dhanbad: टाटा स्टील के झरिया डिविजन अंतर्गत संचालित भेलाटांड कोलियरी में कार्यरत दैनिक ठेका मजदूर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए। मजदूर न्यूनतम मजदूरी, श्रमिक सुविधाएं और अन्य अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। हड़ताल का असर कोयला उत्पादन पर भी पड़ने लगा है, जिससे कंपनी को प्रतिदिन लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दुर्गा मंदिर मैदान से निकाला मार्च
सुबह से बड़ी संख्या में मजदूर भेलाटांड दुर्गा मंदिर मैदान में जमा हुए। वहां से उन्होंने नारेबाजी करते हुए कंपनी के मुख्य गेट तक मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने “न्यूनतम मजदूरी लागू करो”, “ठेका मजदूरों का शोषण बंद करो” और “संविदा प्रथा खत्म करो” जैसे नारे लगाए।
मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर दी चेतावनी
कंपनी के मुख्य प्रवेश द्वार पर मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया और जल्द मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद मजदूर फिर दुर्गा मंदिर मैदान लौटे, जहां बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
मजदूरों ने संवेदकों पर लगाया शोषण का आरोप
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आनंद गोप ने आरोप लगाया कि ठेका मजदूरों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूर खदानों में जोखिम भरा काम करते हैं, फिर भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों को मेडिकल सुविधा, सुरक्षा उपकरण, छुट्टी, ओवरटाइम, पीएफ और ईएसआई जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार अधिक मुनाफे के लिए श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं, जबकि कंपनी को इस दिशा में जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
कोयला उत्पादन पर पड़ा असर
एक साथ बड़ी संख्या में ठेका मजदूरों के हड़ताल पर चले जाने से कोलियरी में उत्पादन कार्य प्रभावित हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, प्रतिदिन लाखों रुपये के नुकसान की संभावना जताई जा रही है। हालांकि कोलियरी प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वार्ता की संभावना, प्रशासन की नजर
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार प्रबंधन और मजदूरों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि ठेका मजदूर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर असंतोष जता रहे हैं और पहले भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।