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  • 2026-05-18

Adityapur News: आदित्यपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान से सहमे फुटपाथी दुकानदार, बसाने से पहले उजाड़ने की नीति पर खड़े हुए सवाल, 10 साल से वेंडिंग जोन का इंतजार

Adityapur News: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर और कांड्रा क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा अवैध अतिक्रमण हटाओ अभियान स्थानीय छोटे दुकानदारों के लिए आफत बन गया है. कांड्रा से आदित्यपुर ब्रिज तक सर्विस लाइन खाली कराने की इस प्रशासनिक कार्रवाई ने दशकों से सड़क किनारे अपनी रोजी-रोटी चला रहे गरीबों की नींद उड़ा दी है. विशेषकर आदित्यपुर थाना रोड के दुकानदारों में भारी खौफ है, जो पिछले 30 वर्षों से यहां छोटी दुकानें लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. इन दुकानदारों में कई कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और कई विधवा महिलाएं हैं, जिनका पूरा घर इसी कमाई पर निर्भर है.

दशकों पुराना वादा भूली सरकार, सिर्फ कागजों में सिमटा वेंडिंग जोन
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें हटाया जा रहा है, बल्कि साल 2016 में भी ऐसा ही एक बड़ा अभियान चला था. उस समय जिला प्रशासन ने वादा किया था कि दुकानदारों को उजाड़ने से पहले एक व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनाकर दिया जाएगा ताकि वे सम्मान से रोजगार कर सकें. इस वादे को बीते 10 साल हो चुके हैं, लेकिन वेंडिंग जोन की योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई. अब बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के दोबारा बुलडोजर चलाने की इस कार्रवाई ने प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

रसूखदारों की अवैध बहुमंजिला इमारतों पर मेहरबान है प्रशासन
प्रशासनिक कार्रवाई के इस दोहरे मापदंड को लेकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों में भारी आक्रोश व्याप्त है. टाटा-कांड्रा मुख्य सड़क पर नियमों को ताक पर रखकर कई बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जिनमें से कई के पास न तो स्वीकृत नक्शा है और न ही पार्किंग की कोई व्यवस्था है. इन ऊंची इमारतों के बेसमेंट में दुकानें चल रही हैं और ग्राहकों के बड़े वाहन मुख्य सड़क पर पार्क होते हैं, जो इस मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम की असली वजह हैं. पीड़ितों का सीधा सवाल है कि इन रसूखदार बिल्डिंग मालिकों पर अब तक कोई कानूनी नोटिस या बुलडोजर क्यों नहीं चला.

"पहले व्यवस्थित ढंग से बसाओ, फिर हटाओ" की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का स्पष्ट कहना है कि वे शहर के विकास और सुंदरीकरण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर मानवीय संवेदनाओं को ताक पर नहीं रखा जा सकता. उन्होंने मांग की है कि रेहड़ी-पटरी वालों को हटाने से पहले सरकार और प्रशासन उन्हें बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से युक्त मार्केट बनाकर दे और वहां शिफ्ट करे. लाठी मारकर भगाओगे तो वो जाएगा कहां,  भीख मांगेगा? क्या चाहते हो?
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