Current News: अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोंगो में इबोला वायरस के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. लगातार बढ़ते संक्रमण और 80 से ज्यादा मौतों के बाद World Health Organization यानी WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार संक्रमण तेजी से फैल रहा है और कई इलाकों में हालात नियंत्रण से बाहर होते दिखाई दे रहे हैं. यह वायरस बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह इंसानों के साथ जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है और हर साल बड़ी संख्या में मौतों का कारण बनता है. इबोला वायरस को लेकर कहा जाता है कि यह वायरस बंदरों से फैलता है और इससे हर साल 15000 से ज्यादा मौतें होती हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य और पश्चिम एशिया में इसके मरीज सबसे ज्यादा पाए जाते हैं. इस वायरस का नाम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोंगो की एक नदी के नाम पर रखा गया है जहां पहली बार इसका मामला सामने आया था.
इबोला वायरस कैसे बना दुनिया के लिए बड़ा खतरा
इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में से एक माना जाता है. यह इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकता है. इस बीमारी का पहला मामला साल 1976 में सामने आया था. तब से लेकर अब तक यह समय समय पर अलग अलग देशों में फैलता रहा है और कई जानें ले चुका है. यह संक्रमण शरीर के अंदर पहुंचकर इम्यून सिस्टम को बहुत कमजोर कर देता है जिससे मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगती है.
WHO ने क्यों घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
WHO के अनुसार इबोला से संक्रमित मरीजों में मौत की दर बेहद अधिक है. कई मामलों में यह 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जाती है. कांगो में लगातार बढ़ते मामलों और तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. कई क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दे रही है.
कांगो और आसपास के देशों में तेजी से फैल रहा संक्रमण
रिपोर्ट्स के मुताबिक कांगो के कई इलाकों में सैकड़ों मामले सामने आए हैं. संक्रमण अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा बल्कि शहरी इलाकों तक भी पहुंच चुका है. युगांडा में भी संक्रमित मरीज मिलने के बाद वहां अलर्ट जारी कर दिया गया है. हालात को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं.
इबोला के लक्षण कैसे पहचानें
इबोला संक्रमण की शुरुआत अक्सर बुखार से होती है. इसके बाद स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है. मरीज में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कुछ मामलों में गले में दर्द भी हो सकता है. यह लक्षण धीरे धीरे शरीर को कमजोर करते जाते हैं और स्थिति गंभीर बन जाती है.
कैसे फैलता है इबोला वायरस और क्यों जरूरी है सावधानी
इबोला वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता है. यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है जैसे खून, पसीना, लार और उल्टी. यही कारण है कि इस बीमारी में भीड़ भाड़ वाली जगहों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है. संक्रमण के खतरे को देखते हुए सावधानी और स्वच्छता बेहद जरूरी मानी जाती है.
शरीर पर क्या असर डालता है इबोला वायरस
इबोला वायरस शरीर में पहुंचकर इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है. कई गंभीर मामलों में मरीजों को अंदरूनी रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग का सामना करना पड़ता है. यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है और मरीज की हालत तेजी से बिगड़ती है.
इबोला को लेकर दुनिया क्यों है सतर्क
कांगो और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते मामलों, तेजी से फैलते संक्रमण और उच्च मृत्यु दर को देखते हुए दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. WHO की ओर से इमरजेंसी घोषित होने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं. युगांडा जैसे पड़ोसी देशों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. इसी बीच कांगो में हालात पर नजर रखी जा रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
इबोला से जुड़ी अन्य जानकारी और स्वास्थ्य सलाह
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इबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है जो समय समय पर दुनिया के लिए चुनौती बनता रहा है. कांगो में बढ़ते मामलों और WHO द्वारा घोषित ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि इस बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता. सतर्कता, समय पर पहचान और सावधानी ही इससे बचाव का सबसे बड़ा तरीका है.