Ranchi News: रांची स्थित रिम्स की लगभग 7 एकड़ अधिग्रहित जमीन की अवैध खरीद बिक्री के मामले में आरोपी सुमित्रा बड़ाईक और राजेश झा की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई संपन्न हो गई है. गुरुवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी की विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया. अब अदालत 21 मई को यह स्पष्ट करेगी कि आरोपियों को जमानत मिलेगी या नहीं. सुमित्रा बड़ाईक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत जबकि राजेश झा ने नियमित जमानत के लिए अर्जी दी है.
फर्जी वंशावली के आधार पर रची गई साजिश
जांच में यह बात सामने आई है कि भू-माफियाओं ने वर्ष 1964 और 1965 के दौरान रिम्स के लिए ली गई सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताया था. इसके लिए फर्जी वंशावली तैयार की गई और बिल्डरों के साथ मिलीभगत करके करीब 31 लाख रुपये में जमीन का सौदा कर दिया गया. इस घोटाले में एसीबी ने पिछले महीने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों कार्तिक बड़ाईक, राज किशोर बड़ाईक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा को गिरफ्तार किया था.
16 सरकारी अधिकारी जांच के घेरे में
झारखंड हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद इस मामले की जांच में तेजी आई है. जालसाजी का यह मामला केवल निजी व्यक्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि विभाग के 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी एसीबी की रडार पर हैं. इन कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने दस्तावेजों की सही जांच किए बिना फर्जीवाड़े में मदद की. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद अब इन अधिकारियों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है.
बिल्डरों को बेची गई सरकारी संपत्ति
अब तक की जांच के अनुसार आरोपियों ने सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करके रिम्स की कीमती जमीन को निजी बिल्डरों के हाथों बेच दिया था. इस पूरे खेल में वंशावली को आधार बनाकर मालिकाना हक का झूठा दावा पेश किया गया था. 21 मई को आने वाला अदालती फैसला इस मामले के अन्य फरार आरोपियों और संलिप्त सरकारी कर्मचारियों के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.