Jharkhand: गुमला में एक महिला के साथ दुष्कर्म और आईटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) मनोज पासवान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाते हुए मनोज पासवान को संगठन की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है।
पद और सदस्यता दोनों छिनी
मनोज पासवान गुमला शाखा के निलंबित सचिव के पद पर कार्यरत थे। झारखंड पुलिस एसोसिएशन की केंद्रीय समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें सचिव पद से हटाने के साथ-साथ संगठन से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि संगठन के किसी भी सदस्य द्वारा अनुशासहीनता या आपराधिक कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
खूंटी जिले की एक 25 वर्षीय युवती ने गुमला के महिला थाने में मनोज पासवान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। युवती ने उन पर दुष्कर्म और आपत्तिजनक सामग्री से संबंधित आईटी एक्ट की धाराओं के तहत आरोप लगाए थे। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। 12 मई को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुराना रहा है विवादों से नाता
यह पहली बार नहीं है जब मनोज पासवान विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी उन पर महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और अन्य गंभीर आरोप लग चुके हैं। बार-बार लग रहे इन आरोपों और हालिया दुष्कर्म मामले ने पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया है, जिसके बाद एसोसिएशन ने यह कड़ा कदम उठाया।
एसोसिएशन का सख्त रुख,"छवि से समझौता नहीं"
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि पुलिस विभाग और संगठन की मर्यादा सर्वोपरि है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा, "पुलिसकर्मी का काम समाज की रक्षा करना है, न कि अपराध में संलिप्त होना। संगठन की छवि खराब करने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।"