Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा नियमावली (PESA Rules) को सही ढंग से लागू न करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने रायमूल बांद्रा व अन्य की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है. अदालत ने प्रार्थी द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों पर सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.
संविधान और मूल भावना से खिलवाड़ का आरोप
प्रार्थी का आरोप है कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली की मूल भावना के साथ खिलवाड़ किया है. याचिका में कहा गया है कि नियमावली का उद्देश्य आदिवासियों और मूलवासियों को पूर्ण अधिकार देना था, लेकिन सरकार ने इसमें मनमाना संशोधन कर दिया. प्रार्थी के अनुसार, संशोधन की वजह से आदिवासियों को वे हक नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं. आरोप लगाया गया है कि सरकार ने तंत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए नियमों को केवल एक आई वॉश (छलावा) बना दिया है.
सरकार से पूछे गए तीखे सवाल
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है. अदालत ने पूछा है कि क्या प्रार्थी द्वारा उठाए गए बिंदुवार सवाल सही हैं? साथ ही, सरकार से यह भी पूछा गया है कि क्या नियमावली में किए गए बदलाव संविधान के अनुरूप हैं? कोर्ट ने सरकार को इन सभी तकनीकी और संवैधानिक पहलुओं पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है.
जून में होगी अगली अहम सुनवाई
अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकार को अगली सुनवाई तक अपना जवाब अनिवार्य रूप से दाखिल करना होगा. इस मामले की अगली सुनवाई जून के अंतिम सप्ताह में तय की गई है. इस सुनवाई में सरकार के जवाब के आधार पर यह तय होगा कि पेसा नियमावली में किए गए संशोधन संवैधानिक रूप से वैध हैं या नहीं. फिलहाल, आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों से जुड़े इस मामले पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं.