Jamshedpur: टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम की ओर से उप मंडल रेल अस्पताल में आपदा प्रबंधन को लेकर विशेष प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण रेल अस्पताल के मेल वार्ड के सामने स्थित कैंटीन परिसर में कराया गया, जहां अस्पताल कर्मियों को आगजनी और आपात स्थिति से निपटने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। कार्यक्रम में अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों, नर्सों, कर्मचारियों और मरीजों की भी मौजूदगी रही।
चिकित्सा अधिकारी और रेलकर्मी रहे मौजूद
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उप मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुतलू मुर्मू, वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. टोपनो, मंडल चिकित्सा अधिकारी, नर्स, ड्रेसर, लिपिक समेत बड़ी संख्या में रेलकर्मी और मरीज उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य अस्पताल परिसर में किसी भी आपदा या आगजनी की स्थिति में त्वरित और सुरक्षित बचाव कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
आग लगने के कारणों और बचाव के उपायों की दी जानकारी
कार्यक्रम की शुरुआत सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने की। उन्होंने अस्पताल और अन्य संस्थानों में आग लगने के सामान्य कारणों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वायरिंग में लूज कनेक्शन, टूटे-फूटे स्विच और प्लग का इस्तेमाल, तथा अस्थायी बिजली उपकरणों का उपयोग दुर्घटनाओं को आमंत्रित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर की समय पर सर्विसिंग नहीं होने से ब्लास्ट की घटनाएं हो सकती हैं, जो बाद में बड़ी आग का रूप ले लेती हैं।
महंगे उपकरणों की सुरक्षा को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि अस्पतालों में लगे महंगे उपकरण जैसे एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों में आग लगने की स्थिति में सामान्य अग्निशामक यंत्र की जगह CO2 फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग अधिक प्रभावी होता है। इससे आग बुझाने के साथ-साथ मशीनों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। अधिकारियों ने अस्पताल कर्मियों को इस तरह की परिस्थितियों में घबराने के बजाय सही उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी दी।
मरीजों को सुरक्षित निकालने का कराया गया अभ्यास
डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने अस्पताल में आग लगने की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया। इस दौरान स्टॉप-ड्रॉप-रोल तकनीक, ब्लैंकेट ड्रैग और टो ड्रैग रेस्क्यू विधि के जरिए बचाव कार्यों का अभ्यास कराया गया। वहीं डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने अग्निशामक यंत्र के इस्तेमाल से जुड़े “PASS” नियम की जानकारी देते हुए आग बुझाने की मॉक ड्रिल कराई। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद चिकित्सा अधिकारियों ने भी स्वयं अग्निशामक यंत्र चलाकर अनुभव प्राप्त किया।
अस्पताल प्रशासन ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम के अंत में उप मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुतलू मुर्मू ने रेल सिविल डिफेंस टीम द्वारा दिए गए प्रशिक्षण की सराहना की। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन वाले कमरों में जल्द ही CO2 फायर एक्सटिंग्विशर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम अस्पताल कर्मियों को आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करते हैं।